Manmohan Singh: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। 26 दिसंबर 2024 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद केंद्र सरकार ने 26 दिसंबर 2024 से 1 जनवरी 2025 तक सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

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सरकार ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार देने का फैसला किया है, जो 28 दिसंबर को सुबह 11 बजे निगमबोध घाट पर किया गया। जिसमें रक्षा मंत्रालय ने सैन्य सम्मान के साथ एक समारोह का आयोजन किया।

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डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत

डॉ. सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के बाद 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक करियर दशकों तक फैला रहा, जिसमें 1991 से 1996 तक वित्त मंत्री के रूप में उनकी भूमिका भी शामिल है, जब उन्होंने आर्थिक सुधारों का नेतृत्व किया जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को नया आकार दिया।

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आर्थिक संकट के दौरान उनके नेतृत्व को विशेष रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने और देश को महत्वपूर्ण विकास और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए याद किया जाता है। 2014 में कांग्रेस की चुनावी हार के बाद नरेंद्र मोदी के उनके उत्तराधिकारी बनने के बाद उनका दूसरा कार्यकाल समाप्त हो गया, जिसके बाद डॉ. सिंह सार्वजनिक जीवन से रिटायर हो गए।

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ये थी मनमोहन सिंह की पसंदीदा कार

साल 2013 में असम की राज्यसभा सीट से उन्होंने अपनी उम्मीदवारी दायर की थी जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति के बार में बताया था। इस एफिडेविट में मनमोहन सिंह ने अपनी कार कलेक्शन में मारुति 800 का 1996 मॉडल बताया था। इस गाड़ी को मनमोहन सिंह ने उस समय 21 हजार रुपए में खरीदा था, जिसको खरीदने में उनकी पत्नी ने 20 हजार रुपए दिए थे।

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वित्तीय सुधारों में ये थे मनमोहन सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व

एनएसई का प्रस्ताव मई 1992 में वित्त मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डॉ. सिंह के सामने प्रस्तुत किया गया था। इस प्रस्तुति में आईडीबीआई के रवि नारायण और आरएच पाटिल जैसे प्रमुख व्यक्ति शामिल थे। उन्होंने भारतीय बाजारों में प्रचलित मौजूदा ब्रोकर-संचालित मॉडल से अलग एक प्रणाली का प्रस्ताव रखा।

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रवि नारायण ने डॉ. सिंह को बताया कि ऑर्डर-संचालित नजरिए अपनाने से तरलता बढ़ेगी और देश भर में एकीकृत ऑर्डर बुक बनेगी। इसकी क्षमता को पहचानते हुए, डॉ. सिंह ने इस अभिनव अवधारणा को तुरंत मंजूरी दे दी, जो भारत के वित्तीय क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।