नई दिल्ली, मार्च 7। देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज एनएसई की पूर्व एमडी एंड सीईओ चित्रा रामकृष्ण को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व सीईओ और एमडी चित्रा रामकृष्ण को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बीते कल रव‍िवार को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। को-लोकेशन मामले में दिल्ली एक अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत खारिज कर दी थी। फिलहाल उन्हें जांच एजेंसी के मुख्यालय में रखा गया है। बता दें कि तीन दिनों तक उनसे पूछताछ और आवास की तलाशी लेने के बाद सीबीआइ ने यह कदम उठाया है।

Advertisement

शनिवार को दिल्ली कोर्ट नेएनएसई को-लोकेशन मामले में रामकृष्ण की गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका खारिज कर दी थी। सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि रामकृष्ण जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। सीबीआई इस मामले में पिछले 4 साल से जांच कर रही है। सीबीआई ने 25 फरवरी को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी आनंद सुब्रमण्यन को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी ने कुछ हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एक्सचेंज के नेटवर्क सर्वर्स तक कथित अनुचित पहुंच देने के मामले की जांच में आगे बढ़ने के साथ यह कार्रवाई की है। NSE Fraud Case : चित्रा रामकृष्‍ण की जमानत अर्जी खारिज

Advertisement

क्या है एसएनई को-लोकेशन घोटाला
एसएनई को-लोकेशन का मतलब है कि ब्रोकरेज हाउस अपने सर्वर एक्सचेंज को एसएनई के सर्वर से नजदीक रखते हैं। इसके चलते ब्रोकरेज हाउस के सदस्य बहुत तेजी से एसएनई के सर्वर को एक्सेस कर सकते हैं। इससे उन्हें बाय और सेल ऑर्डर जल्दी-जल्दी प्लेस करने में मदद मिलती है। कई ब्रोकरेज हाउस हैं जिन्होंने ये को-लोकेशन की सुविधा चुनी हैं। सेबी को 2015 में एक ब्रोकर से शिकायत मिली कि को-लोकेशन फैसेलिटी लेने वाले बाकी लोगों के मुकाबले कुछ लोगों को ज्यादा जल्दी डेटा मिल रहा था जो को-लोकेशन के सिद्धांत के खिलाफ है। को-लोकेशन में डेटा एक्सेस हर सदस्य के लिए पारदर्शी और बराबर होना चाहिए। इस शिकायत के बाद ही सेबी ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि एसएनई ने सदस्यों के बीच भेदभाव किया है। सेबी की जांच में ये बात सामने आई कि कंपनी के सीईओ रवि नारायण और चित्रा रामकृ्ष्णा के कार्यकाल में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां हुई हैं और इसके लिए ये दोनों जिम्मेदार हैं।