नयी दिल्ली। विदेशी निवेशक एक बार फिर से भारतीय पूंजी बाजार से खफा दिख रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ने जुलाई में अब तक भारतीय बाजारों से 9015 करोड़ रु निकाल लिए हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों पर चिंता के बीच बढ़ता हुआ बाजार एफपीआई को प्रोफिट कमाने के मौके दे रहा है। एफपीआई ने जुलाई में अब तक ये रकम इक्विटी और डेब्ट दोनों तरह की सिक्योरिटी से मिला कर निकाली है। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई ने 1-17 जुलाई के दौरान इक्विटी से 6,058 करोड़ रुपये और डेब्ट सेगमेंट से 2,957 करोड़ रुपये निकाले हैं। यानी कुल 9015 करोड़ रु का निवेश निकाल लिया गया है।
कैसा रहा था जून में हाल
इससे पहले जून में एफपीआई ने 24,053 करोड़ रु का निवेश किया था। वहीं 10 जुलाई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 2,867 करोड़ रुपये निकाले थे। इनमें मुख्य रूप से भारतीय इक्विटी में आई उछाल के बाद लाभ कमाने के लिए ऐसा किया गया था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 10 जुलाई तक इक्विटी से 2,210 करोड़ रुपये और डेब्ट सेगमेंट से 657 करोड़ रुपये निकाले थे।
बाजार में तेजी निवेशकों के लिए अवसर
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि पूंजी बाजारों में आ रही से एफपीआई को लाभ कमाने के अवसर मिल रहे हैं। इसके अलावा कई राज्य भी बढ़ते कोरोनोवायरस के मामलों को रोकने के लिए नए सिरे से लॉकडाउन लागू कर रहे हैं, जो निवेशकों के लिए चिंताजनक है क्योंकि इससे घरेलू अर्थव्यवस्था में वृद्धि में देरी हो सकती है। इस हफ्ते में दक्षिण कोरिया को छोड़ कर अधिकतर उभरते हुआ बाजारों में एफपीआई द्वारा बिकवाली ही की गई है। घरेलू मोर्चे पर कोरोना के बढ़ते मामले और आर्थिक विकास में रिकवरी असल चुनौतियां हैं और ये विदेशी निवेशकों के लिए भी बाधा बनी रहेंगी।
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