Foreign exchange reserves: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार में बीते सप्ताह एक झटके में 9.112 अरब डालर बढ़ गया है। आरबीआई की तरफ से जारी आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इन आंकड़ों के अनुसार बीते सप्ताह कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 615.971 अरब डालर हो गया। जानकारों का मानना है कि विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी का मुख्य कारण शेयर बाजार में विदेशी निवेश का बढ़ना है।
वहीं यह विदेशी मुद्रा भंडार का 20 महीने का उच्च स्तर है। इससे पिछले सप्ताह भी विदेशी मुद्रा भंडार में 2.816 अरब डालर की वृद्धि हुई थी। आरबीआई के अनुसार, 15 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियों (एफसीए) में 8.349 अरब डालर की बढ़ोतरी हुई है। अब कुल एफसीए बढ़कर 545.048 अरब डालर पर पहुंच गई हैं। देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में एफसीए की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
विदेशी मुद्रा के मामले में दुनिया के टॉप 5 देश
- चीन: 3.70 ट्रिलियन डॉलर
- जापान: 1.53 ट्रिलियन डॉलर
- स्विट्जरलैंड: 1.32 ट्रिलियन डॉलर
- रूस: 622,000 बिलियन डॉलर
- भारत: 615.971 बिलियन डॉलर
नोट: यह आंकड़े रविवार तक के अपडेट हैं।
यह दलाल स्ट्रीट में संभवत: 2023 में अपने सबसे अच्छे समय में से एक है, क्योंकि इस दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों ने केवल पांच दिनों में घरेलू इक्विटी में 2 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। बीते सप्ताह में, एफपीआई ने 21,641 करोड़ रुपये (2.6 बिलियन डॉलर) की शुद्ध इक्विटी खरीदी है, जबकि पिछले सप्ताह में 13,847 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की गई थी। एक तरफ विदेश निवेश आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेशक शेयर बचे रहे है, जो सिलसिला अब रुक गया है। यही कारण है कि भारत का विदेशी निवेश तेजी से बढ़ा है।
डॉलर के संदर्भ में व्यक्त, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी इकाइयों की सराहना या मूल्यह्रास का प्रभाव शामिल होता है।
इसी तरह, बीते सप्ताह गोल्ड रिजर्व 44.6 करोड़ डालर बढ़कर 47.577 अरब डालर पर पहुंच गया। जानकारों का कहना है कि विदेशी मुद्रा बाजार में आरबीआइ के हस्तक्षेप और मूल्यांकन में बदलाव से विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हुआ है।
अक्टूबर 2021 में, देश की विदेशी मुद्रा निधि 645 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऑल टाइम हाई पर था। पिछले साल से वैश्विक विकास के कारण दबाव के बीच केंद्रीय बैंक ने रुपये की रक्षा के लिए पूंजी भंडार को तैनात कर दिया, जिससे भंडार प्रभावित हुआ।
शीर्ष बैंक ने कहा कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 135 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 18.323 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गए। शीर्ष बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि समीक्षाधीन सप्ताह में आईएमएफ के साथ भारत की आरक्षित स्थिति 181 मिलियन अमेरिकी डॉलर बढ़कर 5.023 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई।
मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार देश के हित में
जिस देश के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार होता है, उस देश की आर्थिक स्थिति भी अच्छी मानी जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि अगर दुनिया में कोई दिक्कत आ जाए तो देश अपनी जरूरत का सामान कई माह तक आसानी से मंगा सकता है। इसीलिए दुनिया के बहुत से देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार को काफी मजबूत बना कर रखते हैं। विदेशी मुद्रा भंडार में निर्यात के अलावा विदेशी निवेश से डॉलर या अन्य विदेशी मुद्रा आती है। इसके अलावा भारत लोग जो विदेश में काम करते हैं, उनकी तरफ से भेजी गई विदेशी मुद्रा भी बड़ा स्रोत होती है।
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