Fixed Income: पिछले कुछ वर्ष फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहे है। कोरोना के शुरू होने के बाद केंद्रीय बैंकों ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ब्याज की दरों को घटाया था। जिस वजह से जो फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) है। इसके सहित सभी फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स का अट्रैक्शन घट गया। बाद में महंगाई ने बढ़ना शुरू कर दिया। इसके बाद महंगाई में नियंत्रण पाने के लिए बैंकों ने ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करना शुरू कर दिया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने पिछले साल यानी मई 2022 से अब तक रेपो रेट 2.5 प्रतिशत तक बढ़ा चुका है। ऐसे में आज हम आपको फिक्स्ड इनकम इन्वेस्टमेंट के 5 ऐसे प्रोडक्ट्स के बारे में बता रहे हैं, जिसमें बेहतर रिटर्न मिल सकता है, तो फिर आइए जानते हैं इसके बारे में।
एनसीडी एक फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स हैं। कई सारी कंपनियां होती है। जो कंपनियां पब्लिक इश्यू के माध्यम से लंबे समय के फंड जुटने के लिए एनसीडी इश्यू पेश करती हैं। इनकी अवधि 1 वर्ष से लेकर 7 वर्ष हो सकती है। जो पहले से ही तय होती है। जो एनसीडी रिटेल निवेशकों को अलॉट किए गए है। यह एनसीडी एक्सचेंजों पर लिस्ट है। इसमें भी शेयरों की तरह ही ट्रेडिंग होती है। अगर हम इनके ब्याज दर की बात करें, तो यह 8.4 प्रतिशत से लेकर 9 प्रतिशत के बीच है।
जो निवेशक जोखिम नहीं लेना चाहते है। वहां एफडी में निवेश करना पसंद करते है। अब कई सारे छोटे बैंक शुरू हो गए है। जिस वजह से लोगों के लिए एफडी के काफी अधिक विकल्प बाजार में आ रहे है। इनकी ब्याज दर पहले से तय होती है। जिस वजह से ग्राहकों को इस तरह के प्रोडक्ट काफी आकर्षित करते है। अभी बैंक एफडी की ब्याज दर करीब 7.3 प्रतिशत से 8.13 प्रतिशत चल रहा है।
टारगेट मैच्योरिटी फंड्स (टीएमएफ)
टाइमफ्रेम को लेकर स्पष्ट निवेशकों के लिए टीएनएफ अट्रैक्टिव हो सकता है, यह पैसिवली मैनेज्ड डेट म्यूचुअल फंड्स हैं। टीएमएफ फिक्स्ड-इनकम सूचकांकों को ट्रैक करते हैं। ऐसे फंड की वाईटीएम 7.3 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत रही है।
एसडीएफ अपना अधिकतर इन्वेस्टमेंट शॉर्ट टू मीडियम मैच्योरिटी वाले बॉन्ड में करती हैं। जो एसडीएफ है। यह 1 साल से लेकर 3 वर्ष के मैकेलय ड्यूरेशन वाले बॉन्ड में निवेश करते है। लॉन्ग मैच्योरिटी के मुकाबले शॉर्ट मैच्योरिटी वाले बॉन्ड्स में ब्याज दरों का बदलाव थोड़ा कम होता है। जब ब्याज की दरें बढ़ रही होती है। तब एसडीएफ में निवेश का पसंदीदा माध्यम होता है। अगर हम इसका रोलिंग रिटर्न की बात करें, तो फिर यह 7 प्रतिशत से लेकर 7.6 प्रतिशत तक रहा है।
टैक्स फ्री बॉन्ड्स
प्रदेशों की इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियों की तरफ से वित्तीय वर्ष 2011-12 से 2015-16 के बीच टैक्स-फ्री बॉन्ड्स जारी किए गए थे। इन बॉन्ड्स को एक्सचेंजों पर लिस्ट कराया गया था। अपने डीमैट खाते के माध्यम से निवेशक इसको खरीद सकते है। इन बॉन्ड्स का ब्याज का जो भुगतान है। यह साल में एक बार होता है। जिस पर टैक्स नहीं लगता है। यह टैक्स फ्री बॉन्ड के कूपन रेट 8.1 प्रतिशत से लेकर 8.7 प्रतिशत के बीच हैं।
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