Fiscal deficit: मंगलवार को द कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स की तरफ से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-सितंबर अवधि में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बढ़कर 7.02 लाख करोड़ रु हो गया, जो अप्रैल-अगस्त अवधि में 6.43 लाख करोड़ रु था।
बता दें कि 7.02 लाख करोड़ रु पर चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य 17.87 लाख करोड़ रुपये का 39.3 फीसदी है। अप्रैल-सितंबर 2022 अवधि के लिए राजकोषीय घाटा 2022-23 के लक्ष्य का 37.3 फीसदी था।
ये लगातार दूसरा महीना है जब केंद्र का राजकोषीय घाटा एक वर्ष पहले की अवधि की तुलना में कम था, जो सितंबर में 59 हजार 35 करोड़ रुपये था, जो वार्षिक आधार पर 25 फीसदी कम था।
भारत सरकार का सितंबर में नेट टैक्स रेवेन्यू वार्षिक आधार पर 14.3 फीसदी बढ़कर 3.56 लाख करोड़ रु हो गया। इसकी वजह कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन 26.6 फीसदी बढ़कर 2.12 लाख करोड़ रु हो गया।
जबकि व्यक्तिगत आयकर कलेक्शन 15.6 फीसदी बढ़कर 91 हजार 247 करोड़ रु हो गया। इससे सितंबर में कुल प्राप्तियां 9.3 फीसदी अधिक हो गईं।
अप्रैल-सितंबर अवधि के लिए केंद्र की कुल प्राप्तियां 17.7 फीसदी ज्यादा हैं, कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन पिछले साल की तुलना में 20.2 फीसदी ज्यादा है और इनकम टैक्स कलेक्शन 31.1 फीसदी ज्यादा है।
2023-24 के बजट के मुताबिक, 2022-23 में संग्रहित की तुलना में इस साल कॉर्पोरेट इनकम टैक्स कलेक्शन और व्यक्तिगत इनकम टैक्स कलेक्श में वृद्धि का अनुमान क्रमशः 11.7 फीसदी और 11.4 फीसदी था।
अगस्त की तरह केंद्र ने राज्यों को टैक्स ट्रांसफर के रूप में 72 हजार 961 करोड़ रु हस्तांतरित किए, जिससे 2023-24 की पहली छमाही के लिए कुल राशि 4.55 लाख करोड़ रु हो गई, जो वार्षिक आधार पर 21.1 फीसदी ज्यादा है।
जानिए क्या होता है फिस्कल डेफिसिट
दरअसल फिस्कल डेफिसिट सरकार के खर्च और रेवेन्यू के बीच का अंतर होता है।
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