नई दिल्ली, अप्रैल 19। लंबे समय से एफडी भारत में एक लोकप्रिय निवेश ऑप्शन रहा है। मगर आपको मालूम होगा कि बैंक एफडी पर मिलने वाले पूरे ब्याज पर 'अन्य स्रोतों से आय' के रूप में टैक्स लगता है। मौजूदा नियमों के अनुसार ब्याज इनकम पर लागू टैक्स रेट के हिसाब से ही टैक्स लगता है। पर कई मौकों पर करदाता एफडी पर होने वाली ब्याज इनकम की जानकारी देने में गलती करते हैं, जिससे उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से नोटिस भेज दिया जाता है। आप ऐसी गलती न करें। यहां हम आपको एफडी के ब्याज पर टैक्स के नियम की जानकारी देंगे। साथ ही बताएंगे कि आपको कैसे आईटीआर (इनकम टैक्स रिटर्न) में अपनी ब्याज इनकम दिखानी चाहिए ताकि आप टैक्स विभाग के नोटिस से बच सकें।

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बैंक काटता है टीडीएस

एफडी के ब्याज पर बैंक टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (टीडीएस) घटाते हैं। यदि आपकी इनकम टैक्स छूट वाली लिमिट में है तो आपको प्राप्त ब्याज के लिए टीडीएस नहीं देना होगा। बैंक 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटते हैं। यदि आपके पास स्थायी खाता संख्या (पैन) नहीं है तो बैंक 20 फीसदी की दर से टीडीएस काटेगा। अगर आपकी इनकम टैक्स लिमिट से कम है तो आपको टीडीएस काटे जाने से बचने के लिए इस बारे में बैंक को सूचित करना होगा।

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इनकम टैक्स के नोटिस

पिछले कुछ महीनों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बहुत सारे लोगों को नोटिस भेजे हैं। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार ये नोटिस इसलिए भेजे गए क्योंकि ऐसे लोगों की ब्याज इनकम आयकर विभाग के पास मौजूद डेटा से नहीं मिलती है। हालांकि इसका कारण यह है कि लोग नहीं जानते कि आईटीआर में कैसे एफडी पर मिलने वाले ब्याज की जानकारी दी जाए।

ऐसे बचें नोटिस से

एफडी निवेशक के पास आईटीआर में ब्याज की प्राप्ति को ईयर ऑफ एक्रुअल के अलावा ईयर ऑफ रिसीट में भी दिखाने का ऑप्शन है। यानी आप ब्याज की डिटेल हर साल भी सकते हैं या उस साल भी दे सकते हैं जब आपको एफडी का ब्याज मिले। मगर जानकारों की राय है कि आप ईयर ऑफ एक्रुअल में ही ब्याज इनकम की जानकारी दें।

जानिए इनकम टैक्स का नियम

60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को 2.5 लाख रुपये से कम की आय पर टैक्स का भुगतान करने से छूट दी गई है। 60 से 80 साल आयु वालों के लिए 3 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है। 80 वर्ष से अधिक आयु के किसी व्यक्ति के लिए 5 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त है। इस कारण से दो प्रकार के आईटीआर फॉर्म होते हैं। इनमें फॉर्म 15जी 60 वर्ष से कम आयु वालों के लिए और 60 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए फॉर्म 15एच होता है।

समझिए जरूरी बात

हर साल बैंक ब्याज पर टीडीएस काटता है। इसकी जानकारी आप आईटीआर फॉर्म 26एएस में दे सकते हैं। इससे टीडीएस और एनुअल इंटरेस्ट के डेटा में कोई फर्क नहीं होगा। इससे टैक्स विभाग के नियमों की भी अनदेखी नहीं होगी। इस तरह आप इनकम टैक्स विभाग के नोटिस से बच जाएंगे।