अब तक FASTag का नाम आते ही दिमाग में टोल प्लाजा पर बिना रुके पेमेंट की तस्वीर बनती थी। हाईवे पर गाड़ी चलाते हुए टोल बूथ पर रुकने की झंझट खत्म हो गई थी। लेकिन आने वाले समय में FASTag की भूमिका और भी बड़ी होने वाली है। केंद्र सरकार FASTag को एक मल्टीपर्पस डिजिटल पेमेंट सिस्टम के तौर पर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
FASTag को नया रूप देने की योजना
दैनिक भास्कर के अनुसार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की योजना है कि FASTag का इस्तेमाल सिर्फ टोल टैक्स तक सीमित न रहे। सरकार चाहती है कि वाहन चालक यात्रा के दौरान होने वाले कई खर्च एक ही सिस्टम से चुका सकें। इसके लिए बीते कुछ महीनों से पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जो सफल रहा है। अब इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
किन-किन जगहों पर काम आएगा FASTag
नई योजना के तहत FASTag से कई तरह के भुगतान संभव हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं, टोल टैक्स, पार्किंग फीस, पेट्रोल और डीजल भुगतान, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग, हाईवे पर मौजूद फूड आउटलेट, वाहन सर्विस और मेंटेनेंस, शहरों में एंट्री चार्ज इससे ड्राइवरों को अलग-अलग ऐप, कार्ड या कैश रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रेलवे स्टेशन पर भी होगा FASTag का इस्तेमाल
सरकार बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी FASTag आधारित पार्किंग सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इससे स्टेशन के बाहर लगने वाला जाम कम होगा और एंट्री-एग्जिट तेज हो सकेगी। वाहन आते ही ऑटोमैटिक फीस कट जाएगी और बिना रुके बाहर निकला जा सकेगा।
ओवरचार्जिंग से मिलेगी राहत
अक्सर पार्किंग में ज्यादा पैसे लेने या बहस की शिकायतें सामने आती हैं। FASTag से ऑटोमैटिक कटौती होने पर यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। फीस तय होगी और सिस्टम खुद रकम काट लेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
डिजिटल फ्रॉड पर भी लगेगा ब्रेक
सरकार का मानना है कि FASTag को वॉलेट की तरह इस्तेमाल करने से डिजिटल धोखाधड़ी के मामले भी कम होंगे। सीमित बैलेंस और ट्रैक होने वाले ट्रांजैक्शन से सुरक्षा मजबूत होगी।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
FASTag के मल्टीपर्पस बनने से सफर ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा। कैश की जरूरत कम होगी, समय बचेगा और भुगतान में झंझट नहीं रहेगी। खासकर रोज हाईवे पर सफर करने वालों के लिए यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
सफर का नया डिजिटल साथी
आने वाले समय में FASTag सिर्फ टोल टैग नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसा डिजिटल साथी बनेगा जो पूरे सफर को आसान बना देगा। अगर योजना सफल रहती है, तो भारत में रोड ट्रैवल का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है।
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