नई दिल्ली: शादियों का रजिस्ट्रेशन करवाने को बढ़ावा देने और बाल विवाह को रोकने के उद्देश्य से असम सरकार ने अरुंधति स्वर्ण योजना शुरू की है। इस योजना के तहत राज्य की हर लड़की की शादी में 10 ग्राम सोना गिफ्ट में दिया जाएगा। यह स्कीम अगले साल 1 जनवरी से शुरू होगी। इसके तहत हर उस वयस्क दुल्हन को, जिसने कम से कम 10वीं तक की पढ़ाई की है और अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन कराया है, उसे राज्य सरकार की ओर से 10 ग्राम सोना उपहार स्वरूप मिलेगा।
बता दें कि राज्य के वित्त मंत्री हिमंत बिस्व सरमा के मुताबिक ‘अरुंधति स्वर्ण योजना' का लाभ पाने के लिए कुछ अन्य शर्तें भी है। जिसका पालन करना अनिवार्य होगा।
- योजना का लाभ लेने के लिए दुल्हन के परिवार की वार्षिक आय पांच लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
- शादी के वक्त लड़की का कम से कम 18 साल और लड़के का 21 साल का होना जरूरी है।
- अरुंधति स्वर्ण योजना का लाभ लड़की की पहली बार शादी पर ही मिलेगा और इसे स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत रजिस्टर कराना होगा।
- हालांकि शैक्षणिक योग्यता वाली शर्त उन लड़कियों पर लागू नहीं होगी, जो चाय बागान समुदाय और आदिवासी समुदाय से हैं।
- इसकी वजह है कि सरकार ऐसी जगहों पर हाईस्कूल स्थापित करने में सक्षम नहीं है। इसके अलावा शैक्षणिक और वित्तीय योग्यता समेत सभी शर्तें दूल्हे पर लागू नहीं होती हैं।
इस बात से अवगत करा दें कि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अरुंधति स्वर्ण योजना के तहत सोना फिजिकल फॉर्म में नहीं दिया जाएगा। शादी के रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के बाद 30000 रुपये दुल्हन के बैंक अकाउंट में जमा किए जाएंगे। इसके बाद उसे सोने की खरीद की रसीद सबमिट करनी होगी। बता दें कि इन पैसों का इस्तेमाल अन्य किसी उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। 10 ग्राम सोने के लिए 30000 रुपये का अमाउंट पूरे साल सोने की औसत कीमत पर गौर करने के बाद तय किया गया है। इसे हर बजट में संशोधित किया जाएगा। शादी को डिप्टी कमिश्नर्स के ऑफिसेज के अलावा सर्किल ऑफिसेज में भी पंजीकृत कराने की अनुमति दी जाएगी।
सरमा ने कहा, कि हम लोग विवाह रजिस्टर्ड यानी पंजीकृत पाए जाने पर प्रत्येक कन्या को उसके विवाह के दौरान एक तोला (10 ग्राम) सोना देंगे। हमारा फोकस सोना देकर वोट बटोरना नहीं है बल्कि विवाह रजिस्टर कराना है। वित्त मंत्री ने बताया कि इस योजना का मकसद लड़कियों को शिक्षा के प्रति जागरुक करना है। इसके अलावा इस योजना से बाल विवाह को रोकने में भी मदद मिलेगी। असम में हर साल करीब तीन लाख शादियां होती हैं लेकिन सिर्फ 50,000-60,000 ही पंजीकृत होती हैं। इस तरह उम्मीद है कि इस योजना के लॉन्च होने के बाद पंजीकृत विवाह का आंकड़ा 2-2.5 लाख पर पहुंच जाएगा।
सरकारी पर 800 करोड़ का पड़ेगा बोझ
अरुंधति स्वर्ण योजना से सरकारी खजाने पर सालाना करीब 800 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। फिलहाल असम सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में इस योजना पर तीन महीनों के लिए 300 करोड़ बजट रखा है।
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