RBI MPC Meeting: देश के करोड़ों लोन लेने वालों के लिए ये दिन बेहद अहम माना जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक पूरी हो चुकी है और अब इसके नतीजों का ऐलान होने वाला है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा कल ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख साफ करेंगे। इस फैसले का सीधा असर होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की EMI पर पड़ सकता है।

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क्यों खास है यह MPC मीटिंग

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब हाल ही में केंद्र सरकार का बजट सामने आ चुका है। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर भी अच्छे संकेत मिले हैं। ऐसे में बाजार और आम लोग दोनों यह जानना चाहते हैं कि RBI आगे की राह को लेकर क्या सोच रहा है। क्या बैंक महंगाई पर ज्यादा ध्यान देगा या फिर आर्थिक ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए ब्याज दरों में राहत देगा।

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रेपो रेट क्या होता है

रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI देश के बैंकों को कर्ज देता है। यही वजह है कि इसे ब्याज दरों की रीढ़ कहा जाता है। जब रेपो रेट कम होता है, तो बैंकों को सस्ता पैसा मिलता है। बैंक भी अपने ग्राहकों को कम ब्याज पर लोन देने लगते हैं। इससे EMI घटती है और लोगों पर वित्तीय बोझ थोड़ा हल्का होता है।

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अगर कटौती हुई तो किसे फायदा

अगर RBI इस बार भी रेपो रेट में कटौती करता है, तो सबसे ज्यादा फायदा फ्लोटिंग रेट वाले लोन धारकों को मिलेगा। होम लोन और कार लोन की EMI कम हो सकती है। इससे मिडिल क्लास परिवारों की मासिक बचत बढ़ेगी और खर्च करने की क्षमता भी सुधरेगी।

पिछले साल का ट्रेंड

बीते साल RBI ने ब्याज दरों के मामले में नरम रुख दिखाया था। 2025 की शुरुआत में पहली बार रेपो रेट घटाया गया था। इसके बाद अप्रैल और जून में भी कटौती की गई। जून में तो बड़ी कटौती देखने को मिली थी। कुछ महीनों तक दरें स्थिर रहीं, लेकिन दिसंबर में फिर से मामूली कटौती हुई। इन सभी फैसलों के बाद रेपो रेट घटकर 5.25 फीसदी तक आ गया।

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इस बार क्या कह रहे हैं जानकार

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार RBI थोड़ा सतर्क रह सकता है। महंगाई पूरी तरह काबू में नहीं आई है और वैश्विक हालात भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं। ऐसे में RBI ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि अगर आर्थिक आंकड़े साथ देते हैं, तो छोटी कटौती से इनकार नहीं किया जा सकता।

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आम आदमी पर सीधा असर

RBI का फैसला सिर्फ बैंकों और बाजार तक सीमित नहीं रहता। EMI कम या ज्यादा होने से आम परिवार का मासिक बजट बदल जाता है। यही वजह है कि हर MPC बैठक आम लोगों के लिए बेहद अहम हो जाती है।

अब सभी की निगाहें RBI गवर्नर के ऐलान पर टिकी हैं। यह साफ हो जाएगा कि लोन लेने वालों को राहत मिलेगी या उन्हें अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

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एक्सपर्ट की राय

ज़्यादातर भारतीय परिवारों के लिए, होम लोन सबसे बड़ी लॉन्ग टर्म देनदारी होती है और हमें उम्मीद है कि बजट अफोर्डेबिलिटी को सपोर्ट करने के लिए होम-लोन टैक्स बेनिफिट्स को मज़बूत करेगा। इसके साथ ही, लेंडर्स से आसान, कर्जदार-फ्रेंडली खुलासों की साफ जरूरत है जैसे कि इंटरेस्ट रेट कैसे कैलकुलेट किया जाता है, समय के साथ क्या बदल सकता है और बदलाव कब लागू किए जाते हैं।

अगर हम लोन की शर्तों को समझना आसान बनाते हैं, तो हम नेशनल लेवल पर ओवरपेमेंट को काफ़ी हद तक कम कर सकते हैं और परिवारों की फाइनेंशियल मज़बूती में सुधार कर सकते हैं।