नयी दिल्ली। पिछले कुछ सालों में इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस) कम जोखिम लेने वाले लोगों के बीच टैक्स बचाने के मामले में काफी बेहतर ऑप्शन बन कर सामने आया है। टैक्स बचाने के लिए ये एक अच्छा निवेश ऑप्शन। आप ईएलएसएस फंड्स में निवेश के जरिए 1.5 लाख रुपये की टैक्स कटौती का क्लेम कर सकते हैं। टैक्स सेविंग के अलावा ईएलएसएस फंड्स में व्यवस्थित निवेश आपके वित्तीय लक्ष्यों के लिए हाई रिटर्न के जरिए बड़ा फंड बन सकता है। भारत में अधिकतर म्यूचुअल फंड्स हाउस ईएलएसएस फंड्स की पेशकश करते हैं। आइये जानते हैं ईएलएसएस फंड्स के 5 बड़े फायदों के बारे में।
ईएलएसएस एक टैक्स बचत प्लान है जिसमें शेयर बाजार या इक्विटी में निवेश किया जाता है। ईएलएसएस फंड इक्विटी से संबंधित इंस्ट्रूमेंट में कैपिटल का एक बड़ा हिस्सा निवेश करते हैं। ये फंड काफी विविध होते हैं, जिसमें लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप और विभिन्न सेक्टरों के शेयर चुने जाते हैं। इन फंड्स में 3 साल की लॉक-इन अवधि होती है, जो फंड मैनेजर को बेहतर दृष्टिकोण के साथ निवेश का फैसला लेने के लिए पर्याप्त समय देता है। यदि आप पांच साल या उससे अधिक समय तक निवेश बरकरार रखना चाहते हैं और टैक्स भी बचाना चाहते हैं तो ईएलएसएस फंड एक बहुत अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
यदि आप पीपीएफ, एनपीएस जैसे दूसरे टैक्स बचाने वाले विकल्पों से तुलना करें तो ईएलएसएस फंड्स की 3 साल की लॉक-इन अवधि (कम से कम निवेश अवधि) सबसे कम है। ईएलएसएस एकमात्र ओपन-एंडेड इक्विटी फंड है, जिसमें लॉक-इन अवधि होती है। इसका मतलब है कि फंड में शामिल होने की तारीख से आपको 3 साल तक निवेश रखना ही होगा। लॉक-इन अवधि समाप्त हो जाने के बाद आपको अपने ईएलएसएस निवेश को जारी रखने या पैसा निकालने की सुविधा मिलती है। इस ऑप्शन में सैलेरी वालों को खास कर फायदा हो सकता है।
ईएलएसएस फंड्स की एक बड़ी रेंज है जिससे निवेशक को ऐसा फंड चुनने में मदद मिलती है जो उसकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करे। ईएलएसएस फंड्स में इक्विटी में अधिकांश पैसा लगाया जाता है, मगर फिर भी दो विभिन्न ईएलएसएस फंड्स अपने पोर्टफोलियो के लिहाज से बिल्कुल अलग हो सकते हैं। कुछ ऐसे फंड हो सकते हैं जो लार्ज-कैप शेयरों में अत्यधिक निवेश करते हैं, जबकि कुछ अन्य ऐसे होंगे जो मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों की ओर अधिक झुकाव रखते हैं। वैसे लार्ज कैप वाले शेयर कम जोखिम वाले होते हैं।
ईएलएसएस फंड में आपके पास एक ही बार में बड़ी राशि और एसआईपी के माध्यम से छोटी राशि में निवेश करने का ऑप्शन मिलता है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि एसआईपी रूट के माध्यम से निवेश करना बेहतर है क्योंकि यह आपको नियमित रूप से बचत करने और छोटी मात्रा में निवेश करने की सुविधा देता है। इससे बाजार की स्थिति की चिंता दूर होती है। ध्यान रहे कि आप ईएलएसएस फंड में जितना चाहें निवेश कर सकते हैं, मगर धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की अधिकतम टैक्स कटौती का क्लेम ही कर सकते हैं। अपने बड़े लक्ष्यों के लिए अधिक रिटर्न हासिल करने के लिए 3 साल की लॉक-इन अवधि खत्म होने के बाद भी आप अपने एसआईपी जारी रख सकते हैं।
ईएलएसएस फंड्स में निवेश के मामले में आपको एसआईपी के जरिए लचीलेपन का भरपूर फायदा मिलता है। छोटी राशि की एसआईपी के साथ शुरू करके आप बाद में इसे बढ़ा सकते हैं। इस तरह आपको निवेश कोई बोझ नहीं लगेगा और आपके पूंजी में भी इजाफा होगा। अगर आपके मौजूदा फंड उम्मीद के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर रहे तो आपके पास अपने निवेश को एक अलग ईएलएसएस फंड में बदलने का विकल्प है। वे महत्वपूर्ण चीजें जो आपको ईएलएसएस में निवेश से पहले आपको ध्यान में रखनी चाहिए, उनमें फंड रिटर्न, फंड हाउस का इतिहास, व्यय अनुपात, फंड मैनेजर और फाइनेंशियल पैरामीटर शामिल हैं।
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