नयी दिल्ली। अगर आपके खास हुनर और ज्ञान है तो आप 750 करोड़ रु जीत सकते हैं। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने एक स्पेशल चैलेंज का ऐलान किया है, जिसमें जीतने वाले को 10 करोड़ डॉलर (करीब 750 करोड़ रु) इनाम में दिए जाएंगे। ई-कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी टेस्ला के प्रमुख और अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने कहा कि उन्होंने "बेस्ट" कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी के लिए 10 करोड़ डॉलर डोनेट करने का प्लान बनाया है। उन्होंने इस प्लान का ऐलान करने के साथ ही कहा कि डिटेल अगले हफ्ते साझा की जाएंगी।
मस्क की संपत्ति में पिछले एक साल में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गयी, जिससे वे अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस से आगे निकल गए। कार निर्माता कंपनी टेस्ला ने लगातार मुनाफा कमाया। इससे रिटेल निवेशक भी कंपनी की तरफ आकर्षित हुए। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में जन्मे कारोबारी की कुल दौलत 202 अरब डॉलर है।
कार्बन कम करने के अलावा मस्क उन कारोबारों पर ध्यान भी दे रहे हैं जो काफी हद तक अर्जेंट पर्यावरणीय समस्याओं के तकनीकी समाधानों पर फोकस करते हैं। जलवायु परिवर्तन को नियंत्रण में रखने के लिए प्लेनेट-वार्मिंग उत्सर्जन को कम करना ऐसी ही कई योजनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। मगर टेक्नोलॉजी के मामले में इस तरफ काफी प्रोग्रेस की गयी है।
वायुमंडल में से कार्बन को बाहर निकालने के बजाय अभी तक कम कार्बन उत्सर्जन पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। मगर मस्क उस टेक्नोलॉजी की बात कर रहे हैं जिससे हवा में मौजूद कार्बन को बाहर निकाला जाए। अंतर्राष्ट्रीय एनर्जी एजेंसी ने पिछले साल के अंत में कहा था कि अगर देशों को शुद्ध-शून्य उत्सर्जन टार्गेट पूरा करना है तो कार्बन कैप्चर तकनीक को लाने के लिए तेज से काम करना होगा।
इंटरनेट पेमेंट कंपनी पेपल होल्डिंग्स के को-फाउंडर और बिक्री करने वाले मस्क अब दुनिया की कुछ सबसे फ्यूचरिस्टिक कंपनियों को लीड करते हैं। इनमें रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स और न्यूरालिंक शामिल है। न्यूरालिंक एक स्टार्टअप है, जो मानव मस्तिष्क को कंप्यूटर से जोड़ने के लिए अल्ट्रा-हाई बैंडविड्थ ब्रेन-मशीन इंटरफेस डेवलप कर रहा है। नये अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए अपने बड़े प्लान के तहत कार्बन कैप्चर तकनीक के डेवलपमेंट में तेजी लाने का संकल्प लिया है। बीते गुरुवार को उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा विभाग में जीवाश्म ऊर्जा के लिए प्रमुख उप सहायक सचिव के रूप में कार्बन हटाने की तकनीक के विशेषज्ञ जेनिफर विलकॉक्स को नियुक्त किया।
इस बीच टेस्ला की भारत में एंट्री हो गई है। बता दें कि टेस्ला ने भारत में अपनी सब्सिडरी कंपनी रजिस्टर कराई है। अमेरिकी दिग्गज कंपनी की भारत में आधिकारिक एंट्री हो गई है। काफी समय से टेस्ला के भारत में एंट्री को लेकर चर्चा चल रही थीं। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) के पास दर्ज जानकारी के अनुसार नई यूनिट टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड बैंगलोर, कर्नाटक में रजिस्टर्ड है और इसे एक विदेशी कंपनी की सब्सिडरी कंपनी के रूप में क्लासिफाइड किया गया है।
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