GDP : नेशनल स्टैटिकल ऑफिस (एनओएस) ने भारत की जीडीपी के लेटेस्ट आंकड़ों को जारी कर दिया है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश ने जनवरी-मार्च 2023 की अवधि में पिछली तिमाही में 4.4 फीसदी की तुलना में 6.1 फीसदी की जीडीपी बढ़त दर्ज की है।

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वही, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2022-23 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.2 फीसदी रही है, तो फिर आइए जानते है इन जीडीपी के आकड़ों पर जानकारों की क्या प्रतिक्रिया है।

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कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज ने कहा है कि जीडीपी की वृद्धि में तेज उछाल ग्लोबल मंदी के बावजूद इंडियन इकोनॉमी के लचीलेपन का सुझाव देती है।

उन्होंने कहा कि ताकत की स्थिरता पर सतर्क रहते है। खासकर जब गैर-कृषि विकास का अधिकांश हिस्सा सार्वजनिक निवेश की वजह से होता है। जबकि खपत सुस्त रहती हैं।

हेडोनोवा की सीईओ सुमन बनर्जी ने कहा कि जीडीपी के आंकड़े जितनी उम्मीद कर रहे थे उससे काफी अधिक है। उन्होंने कहा कि मुझे रूपये ने पिछले 1 वर्ष में डॉलर के मुकाबले कमजोरी दिखाइए है। जबकि निर्यात की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैं।

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इसके अलावा हम अपने तेल निर्यात आयात खर्च को कम करने में सक्षम है। क्योंकि हमारे रूस के साथ लाभप्रद संबंध है।

प्रभुदास लीलाधर पीएमएस में क्वॉन्ट मैक्रो स्ट्रेटजिस्ट रितिका छाबड़ा ने कहा कि चौथी तिमाही में यह वृद्धि एक सरप्राइस है, जनवरी से मार्च की अवधि में बेमौसम बारिश के बावजूद प्रोडक्शन के स्तर पर 5.5 प्रतिशत की एग्रीकल्चर ग्रोथ अपेक्षा के काफी अच्छी है।

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मिलवुड केन इंटरनेशनल के फाउंडर और सीईओ निश भट्ट ने कहा कि जीडीपी डेटा चौथी तिमाही में और साथ ही एफवाई23 विकास दर अधिकाश अनुमानों से ज्यादा है।

क्या होती है जीडीपी

किसी भी देश के लिए जीडीपी एक बेहद ही अहम डेटा होता है। यह डेटा देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तस्वीर दिखाते है। जीडीपी रियल जीडीपी और नॉनिमल जीडीपी दो तरह की होती है।

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अगर हम रियल जीडीपी की बात करें, तो फिर रियल जीडीपी में गुड्स एंड सर्विस की वैल्यू का कैलकुलेशन बेस ईयर की वैल्यू पर किया जाता है। जीडीपी के आंकड़े एनएसओ को और से जारी किए जाते है।