नयी दिल्ली। भारत की सिकुड़ती अर्थव्यवस्था विदेशी निवेशकों को देश के शेयर बाजारों में पैसा लगाने से नहीं रोक रही है। अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने अगस्त में एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी भारत में शेयर बाजारों में 6 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया, जो पिछले साल मार्च के बाद से सबसे अधिक है। ये हाल तब रहा जब इस क्षेत्र में चीन के अलावा बाकी सभी देशों में से विदेशी निवेशकों ने पैसा निकाला। पिछले महीने कुछ बड़ी कंपनियों ने शेयरों की बिक्री की थी, जिसके चलते भी विदेशी निवेशक भारत की तरफ आकर्षित हुए। जिन कंपनियों ने पिछले महीने शेयर बेचे उनमें आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी शामिल हैं। इन तीनों मिल कर ही 4.7 अरब डॉलर के शेयर बेचे।
चीन के साथ भारत टॉप पर
एक विदेशी एक्सपर्ट्स के अनुसार अगले 12 से 24 महीनों के लिए निवेश के लिहाज से चीन के साथ भारत टॉप पर है। भारत के इक्विटी बाजार दुनिया के सबसे तेज ग्रोथ वाले क्षेत्र में से एक हैं। जून तिमाही के आए खराब जीडीपी आंकड़ों के बावजूद विदेशी निवेशकों शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में रिकॉर्ड 23.9 फीसदी की गिरावट आई, मगर सितंबर के पहले 3 दिनों में विदेशी निवेशकों ने 23.1 करोड़ डॉलर का निवेश किया।
कोरोना है अड़चन
इतने भरोसे और बड़ी मात्रा में निवेश के बावजूद तेजी से बढ़ रहे कोरोनावायरस के मामलों ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है। भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 40 लाख के पार पहुंच गई है। इतनी बड़ी संख्या से भारत कोरोना का दुनिया का नया केंद्र बन रहा है। एक्सपर्ट कहते हैं कि जब तक कोरोना मामले जारी रहेंगे तब तक स्थानीय लॉकडाउन से आर्थिक सुधार में बाधा आने की संभावना भी बरकरार रहेगी।
सबसे बुरा दौर बीत गया
एक अन्य एक्सपर्ट कहते हैं कि सबसे खराब बीत गया है और हम लगातार रिकवरी की ओर बढ़ रहे हैं। इसके पीछे वे ऑटो बिक्री में सुधार, भरपूर बारिश से ग्रामीण इनकम में सुधार और केंद्रीय बैंक की आसान मौद्रिक नीति का हवाला देते हैं। जहां सेंसेक्स का सवाल है तो इस साल इसके 41,500 पर रहने का अनुमान लगाया गया है।
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