नयी दिल्ली। 2014 में केंद्र में आने के बाद से ही मोदी सरकार का ध्यान ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर रहा है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मतलब है कि देश में व्यापार करने में आसानी। इस मामले में सरकार ने बहुत सारे कदम उठाये हैं और सफलता भी मिली है। अब केंद्र सरकार ने भारत को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में वर्ल्ड बैंक की मुख्य 50 देशों की सूची में शामिल करने के लिए रोडमैप तैयार किया है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श भी कर रहे हैं। भारत इस समय आसान व्यापार वाले देशों की सूची में 63वें नंबर पर है। सरकार रैंकिंग में सुधार के लिए कई पहलुओं पर ध्यान दे रही है, अनुबंधों को प्रभावशाली बनाना, संपत्ति का पंजीकरण करना, व्यवसाय शुरू करने और टैक्स का भुगतान करने जैसी चीजें शामिल हैं। सरकार ने पहले से ही कोलकाता और बैंगलोर पर ध्यान देने के लिए रणनीति तैयार कर ली है।

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भारत की स्थिति में हुआ है सुधार
वर्ल्ड बैंक की तरफ से अक्टूबर में जारी की गयी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस-2020 रिपोर्ट में भारत ने 14 स्थानों की छलांग लगा कर 63वां स्थान हासिल किया था। 2019 की रिपोर्ट में भारत का स्थान 77वां था। वर्ल्ड बैंक की तरफ से 190 देशें को लिए सूची जारी की जाती है। पिछले साल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस-2020 रिपोर्ट में भारत की स्थिति में सुधार के पीछे सरकार के मेक इन इंडिया और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उठाये गये अन्य कदमों को बताया गया था। सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योग और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने उन क्षेत्रों पर एक प्रेसेंटेशन दी है, जिनमें प्रत्येक विभाग को इस साल पर ध्यान देना है।

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2014 में था 142वां स्थान
2014 में व्यापार सुगमता के मामले में भारत का 142वां नंबर था। मगर सरकार ने इसमें सुधार के लिए लगातार कदम उठाये। सरकार के प्रयासों के चलते अगले 4 सालों में 2018 तक भारत इस मामले में प्रमुख 100 देशों में आ गया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार का लक्ष्य ही भारत को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस वाले देशों की सूची में प्रमुख 50 देशों में लाना है।

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