नयी दिल्ली। भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कोरोना महामारी ने रोजगार को लेकर बहुत बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। करोड़ों लोग इस संकट से बेरोजगार हो गए हैं। नौकरियां चलीं गई और उद्योग-धंधे ठप्प हो गए। ऐसे में लोगों ने दूसरे कारोबारों का रुख किया। लोग कमाई के लिए छोटे-मोटे ही सही मगर नए-नए रास्ते तलाश कर रहे हैं। अगर आप ऐसा ही नया कमाई का जरिया चाहते हैं तो यहां हम आपको एक शानदार ऑप्शन के बारे में बताएंगे, जिससे आप 5000 रु की छोटी रकम से भी कारोबार शुरू कर सकते हैं। इतना ही नहीं सरकार भी इस कारोबार को करने वालों की मदद करेगी।

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शुरू करें ये कारोबार

भारत में लोगों को आज भी प्लास्टिक या स्टील के कप के बजाय मिट्टी के कप (जिन्हें कुल्हड़ भी कहा जाता है) में चाय-कॉफी पीना ज्यादा अच्छा लगता है। हालांकि इन मिट्टी के कपों की आपूर्ति उतनी नहीं है जितनी इनकी मांग होती है। इसके चलते ये कारोबार का एक अच्छा जरिया हो सकता है, क्योंकि इनकी मांग ज्यादा है और स्पलाई कम। ऐसे में आप कम पैसों से ये काम शुरू करके ठीक-ठाक कमाई कर सकते हैं। गौरतलब है कि एक्सपर्ट्स कहते हैं कि प्लास्टिक से बने कप पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। असल में प्लास्टिक के कप से कुछ नुकसान देने वाले केमिकल भी बॉडी के अंदर पहुंच जाते हैं। इसलिए मिट्टी के कपों में चाय-कॉफी पीना ज्यादा बेहतर है। इसी वजह से सरकार भी इनके बनाने वालों को प्रोत्साहित करती है।

क्या है सरकारी योजना

केंद्र सरकार की तरफ से मिट्टी के कप या कुल्हड़ बनाने के काम को बढ़ावा देने के लिए कुम्हार सशक्तिकरण योजना भी लाई गई है। योजना की विशेषता पर गौर करें तो सरकार देश भर में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को विद्युत चाक प्रदान करती है। ये चाक बिजली से चलते हैं। इतना ही नहीं केंद्र सरकार ही कुम्हारों से अच्छे दाम पर इन कुल्हड़ों की खरीदारी करती है।

कितनी लागत कितनी कमाई

अगर आप मिट्टी के कप बनाने का छोटा कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए बेहद कम पैसों की जरूरत होगी। केवल 5000 रु की छोटी पूंजी से भी ये काम किया जा सकता है। जहां तक विद्युत चाक देने का सवाल है तो सरकार की तरफ से ऐसे 25,000 स्पेशल चाक बांट गए हैं। आइए अब जानते हैं कि आप इस कारोबार कितना कमा सकते हैं।

महीने में 30000 रु तक की कमाई

मिट्टी के कप से आप महीने में 30000 रु तक बचा सकते हैं। इस समय इनका रेट 50 रु प्रति 100 कुल्हड़ है। ये रेट उन मिट्टी के कप का है, जो चाय-कॉफी के लिए काम आते हैं। लस्सी पीने में इस्तेमाल होने वाले ऐसे कपों का रेट 150 रु प्रति 100 कुल्हड़ है। वहीं मिट्टी के छोटी प्याले का रेट 100 रु प्रति 100 कप है। इतना ही नहीं अगर डिमांड में इजाफा हो तो आपको और भी अच्छी कीमत मिल सकती है। जहां तक मुनाफे का सवाल है तो इस कारोबार के एक्सपर्ट कहते हैं कि उत्पादन के लिहाज से रोज 1000 रु यानी महीने में 30000 रु तक मुनाफा कमाया जा सकता है।