नयी दिल्ली। लोग अक्सर समय के महत्व को कम करके आंकते हैं। यही कारण है कि शायद लोग निवेश या रिटायरमेंट प्लानिंग बहुत अधिक ध्यान नहीं देते। निवेश और रिटायरमेंट की प्लानिंग के अलावा और भी बहुत सी चीजें ऐसी हैं जो जरूरी हो या या नहीं मगर ज्यादातर लोग उनमें तब तक देरी करते हैं जब तक कि वे बिल्कुल जरूरी न हो जाएं। जहां तक निवेश का सवाल है तो इसमें देरी करने से आपको सिर्फ नुकसान होगा। ये नुकसान आपकी पूंजी में कमी की शक्ल में नहीं होगा, बल्कि देर से निवेश शुरू करने पर आपको मिलने वाले कम रिटर्न के रूप में सामने आएगा। निवेश की दुनिया में एक साल की अवधि आपके पैसों में बहुत अधिक अंतर पैदा कर सकती है। उदाहरण के लिए आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 24 सालों के लिए किए गए उस निवेश में 13.43 लाख रुपये की वृद्धि हो सकती है, जिसे आपने एक साल जल्दी शुरू किया हो या अतिरिक्त 12 महीनों के लिए निवेश किया हो।
ऊपर बताए गए पूंजी के नुकसान को ऐसे समझिए कि मान लें आपने हर महीने 7,000 रुपये की एसआईपी शुरू की और 24 वर्षों तक म्यूचुअल फंड में निवेश किए रखा। अगर आपको मिलने वाला सालाना रिटर्न 12 फीसदी (उदारहण के तौर पर) बरकरार रहता है, तो आपका फाइनल रिटर्न 1,04,59,750 रुपये होगा। निवेशक सिर्फ इस बात से खुश हो सकते हैं कि वे हर महीने सिर्फ 7000 रुपये का निवेश करके करोड़पति बन गए हैं। हालाँकि एक साधारण गणना से पता चलता है कि अगर आपने अपनी असल तारीख से एक साल पहले निवेश करना शुरू कर दिया होता तो 25 साल के कार्यकाल के अंत में आपका रिटर्न 11803446 रुपये होता। यानी एक साल देर से निवेश आपकी पूंजी में 13,43,696 रुपये का नुकसान ला सकता है।
हालांकि आपको ऊपर बताया गया रिटर्न तब ही मिलेगा जब आप निवेश की अवधि के दौरान सभी शर्तों का सही से पालन करें। जैसे कि लगातार निवेश करना। इसमें स्थिति के लिहाज से मिलने वाले रिटर्न पर भी बहुत कुछ निर्भर है। मगर ध्यान रहे कि जल्दी निवेश की शुरुआत बेहद जरूरी है। वरना आप बाकी नियमों को फॉलो करते हुए और बेहतर रिटर्न मिलने के बावजूद एक बड़ा फंड तैयार नहीं कर सकते। दूसरी बात कि आपको तय अवधि से पहले निवेश पूंजी नहीं निकालनी चाहिए। जरूरत के समय पैसों के लिए बेहतर है कि आप कोई इमरजेंसी फंड बनाएं।
जहां तक म्यूचुअल फंड में निवेश का सवाल है तो एसआईपी एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई है। दरअसल इससे थोड़ा थोड़ा निवेश करे लंबे समय में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। ऊपर बताए गए गणित में भी एसआईपी ही अहम है। इससे कम्पाउंडिंग का भी फायदा मिलता है। एसआईपी बाजार के जोखिम को कम करने में मदद करती है और छोटे निवेश को एक बड़ा फंड बनाने की सुविधा देती है। तो अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो जितना जल्दी हो सके उतनी जल्दी निवेश शुरू करें।
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