E-RUPI: सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी सीबीडीसी को ई-रुपया भी कहा जाता है। आपको बताते चलें कि यह एक टोकन होता है जिसे लीगल करेंसी माना जाता है। बीते शुक्रवार को वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने की ई-रूपी के महत्व के बारे में बताया है। यह एक डिजिटल करेंसी है। आपको बताते चलें कि यह विदेश से भारत में भेजे जाने वाले पैसे की लागत को आधा कर सकता है।

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विदेश से पैसे भेजने में आती है कितनी लागत

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अगर यह लागत 5 प्रतिशत के आसपास तक आती है, तो डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल से रेमिटेंस की लागत को 2 से 3 प्रतिशत तक ले जा सकता है। आपको बताते चलें कि सीबीडीसी का इस्तेमाल रेमिटेंस या किसी भी बॉर्डर पर की पेमेंट के लिए किया जा सकता है।

सीबीडीसी का इस्तेमाल कैसे काम बनाएगा आसान

रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेश से भारत में सालाना 100 अरब डॉलर धन भेजा जाता है। लेकिन विदेश से पैसा भेजने के लिए अभी हमारे पास बहुत बेहतर सिस्टम नहीं है, इसमें समय और पैसा भेजने की लागत दोनों ही काफी ज्यादा आते हैं। ई-रुपी का इस्तेमाल करने से विदेश से पैसे भारत भेजने में लगने वाला खर्च लगभग आधा हो सकता है साथ ही समय की भी काफी बचत हो सकती है।

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क्या है ई-रुपया

आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि ई-रुपया एक डिजिटल करेंसी है, इसे केंद्रीय बैंक द्वारा जारी किया गया है। यह डिजिटल टोकन एक लीगल करेंसी की तरह ही है। इसे नोट और सिक्कों के बराबर ही मूल्य वर्ग में जारी किया जाता है। इसका वितरण बैंकों के जरिए किया जा रहा है।

आसान बना देगा विदेश से पैसे भेजने की प्रोसेस

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विशेषज्ञों कर का मानना है कि यह डिजिटल करेंसी विदेश से पैसा ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को काफी ज्यादा आसान और सरल बना देंगे। डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करके आप कम कीमत में बड़ी आसानी से अपने पैसे परिवार के पास भेज पाएंगे।

वैश्विक स्तर पर एक से दूसरे देश में पैसा भेजने पर 8 से 9 प्रतिशत तक की की लागत आती है। गौरतलब है कि भारत में फिलहाल हर ट्रांजैक्शन पर 5 प्रतिशत तक का खर्च आता है। मीडिया रिपोर्ट्स मुताबिक यह सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी इस लागत को घटाकर 2 से 3 प्रतिशत तक लाने में काफी मददगार हो सकती हैं।

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कब हुआ था लॉन्च

गौरतलब है कि यूनियन बजट 2022-23 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने सीबीडीसी की शुरुआत की घोषणा की थी। आरबीआई ने 1 नवंबर को इसी ई-आरयूपीआई की थोक परियोजना शुरू की थी, रिटेल फॉर्म में इसका पायलट परीक्षण साल 2022 के दिसंबर महीने की 1 तारीख से शुरू हुआ था।

किसने किया शुरू

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने वित्तीय सेवा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा साझेदारी बैंकों के साथ मिलकर इस डिजिटल सॉल्यूशन ई-आरयूपीआई को लांच किया गया है। यह कांन्टेक्टलेस आरयूपीआई तकनीक है। पैसे ट्रांसफर करने की यह तकनीक काफी ज्यादा सुरक्षित और संरक्षित है क्योंकि इसमें बेनेफिशरी की डिटेल को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है।

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हर साल हो सकता है 3 अरब डॉलर का फायदा

ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही सीबीडीसी के प्रचलन को बढ़ाया जएगा जिससे लगभग हर उस इंसान को फायदा होगा जो भारत में विदेश से पैसे भेजता है। अभी भारत में विदेश से 100 अरब डॉलर के ट्रांसफर पर करीब 5 अरब डालर तक का खर्च आता है, जो सीबीडीसी के इस्तेमाल के बाद घटकर 2 से 3 अरब रुपए ही रह जाएगा।