नई दिल्ली, अगस्त 28। हो सकता है कि हर बार जब आप किसी गांव की तस्वीर देखते हैं, तो शांति के बाद आपके दिमाग में अगली बात आती होगी गरीबी। पुरानी फिल्मों में भी आपने देखा होगा कि नायक यदि गाँव से ताल्लुक रखता है तो आम तौर पर गरीब होता है। लेकिन भारत के सभी गांवों में गरीबी है ऐसा नहीं है। कई गांव विकास की उस ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं कि वे शहरों से टक्कर लेते हैं। वहीं एक गांव ऐसा है, जिसे करोड़पतियों का गाँव कहा जाता है। ये है महाराष्ट्र का हिवरे बाज़ार। हम आपको यहां इसी गांव की जानकारी देंगे।
गांवों में रहने वाले सभी लोग गरीब नहीं होते, इस बात को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के हिवारे बाजार गांव के निवासियों ने साबित कर दिया है। इस गांव को करोड़पतियों गांव के नाम से जाना जाता है। इस गांव में 50 से अधिक निवासी ऐसे हैं जो करोड़पति हैं। सतत विकास और समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन ने इस गांव के कई निवासियों की आर्थिक तरक्की हासिल करने में काफी मदद की है। यह भारत के उन आदर्श गांवों में से एक है, जो दूसरों के लिए मिसाल हैं। यहां के सभी निवासियों के जागरूक प्रयासों के बाद ही इस गांव की ऐसी काया पलटी है।
30 साल पीछे मुड़ कर देखें तो आप पाएंगे कि ये गांव सूखे और गरीबी की चपेट में था। लेकिन गांव के लोगों ने इसे किस्मत पर नहीं छोड़ा बल्कि खुद अपनी किस्मत बदलने का फैसला किया। इस स्पेशल गांव की सफलता की कहानी का श्रेय ग्राम प्रधान पोपटराव बागुजी पवार को जाता है। इस गांव के 50 से अधिक लोग करोड़पति हैं और ये सभी किसान हैं।
इस शहर के कई निवासियों को स्थिर डेवलप्मेंट और स्थानीय रूप से आधारित नेचुरल रिसॉर्स मैनेजमेंट (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) से लाभ हुआ है। गांव ने एक शक्तिशाली ग्राम निकाय के निर्देशन में सरकारी कार्यक्रमों से प्राप्त पैसे का उपयोग वनों, जलसंभरों और मिट्टी सहित अपने प्राकृतिक संसाधनों को रीजनरेट करने के लिए किया।
गांव का समुदाय संपन्न दुकानों, बेदाग सड़कों, हरे-भरे खेतों और आधुनिक सुविधाओं से युक्त अच्छी तरह से निर्मित घरों का गांव है जो भारतीय शहरों में तक असामान्य हैं। कहा जा सकता है संपन्नता के मामले में इस गांव ने शहरों को भी पीछे छोड़ दिया है। निवासियों के प्रयासों के चलते यह भारत के आदर्श गांवों में से एक है। खुले में शौच, तंबाकू के उपयोग और शराब पीने के साथ-साथ वनों की कटाई, चराई और सिंचाई के लिए नलकूपों का उपयोग भी समुदाय में अवैध है।
इस गांव के अधिकांश ग्रामीण भारतीय समुदायों की आय से लगभग दोगुनी से अधिक कमाते हैं। इससे वे एक सम्मानजनक जीवन स्तर हासिल करने में सक्षम हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा गांव को आदर्श गांव का खिताब भी दिया गया है। इसका श्रेय इस गांव के ग्रामीणों की भागीदारी, ग्राम प्रधान के सुशासन और कड़ी मेहनत को जाता है।
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