Diwali 2024: इस साल जैसे-जैसे कैलेंडर 31 अक्टूबर को बदल रहा है, भारत दिवाली के लिए तैयार है, एक ऐसा त्योहार जो पूरे देश में खुशी, रोशनी और एकता का संचार करता है। दीपावली के नाम से भी जाना जाने वाला यह त्योहार लाखों लोगों के दिलों में गहराई से बसा हुआ है, जिसे जबरदस्त उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाता है।

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देश के अलग अलग राज्य और शहरों में अपने तरीकों से रोशनी करते हैं, उन परंपराओं को प्रदर्शित करते हैं जिन्हें पीढ़ियों से संजोया गया और उन्हे चलाया जा रहा है। असंख्य उत्सवों के बीच, भारत में कुछ स्थान ऐसे हैं जो दिवाली के जादू का एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं।

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उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर अयोध्या में दिवाली का त्यौहार असाधारण उत्साह के साथ मनाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि यह भगवान राम की जन्मभूमि है। लाखों दीयों की रोशनी से शहर जगमगा उठता है, जिससे शहर का एक शानदार नज़ारा बनता है।

उत्तर प्रदेश सरकार हर साल नए रिकॉर्ड बनाने के लिए तैयार रहती है उसी कड़ी में एक बार फिर सरयू नदी के किनारे 28 लाख दीये जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की योजना की घोषणा की है। इसके अलावा राम मंदिर को विशेष पर्यावरण दीयों से रोशन किया जाएगा, जिससे शहर का उत्सवी माहौल और भी बढ़ जाएगा।

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दिवाली के दौरान उत्तर प्रदेश के मुकुट का एक और रत्न वाराणसी है, जो भारत का आध्यात्मिक हृदय है। शहर के गंगा घाट देखने लायक हो जाते हैं क्योंकि वे अनगिनत मिट्टी के दीयों से सजे होते हैं, जो पानी पर एक शांत चमक बिखेरते हैं। नदी के किनारे भक्तों और पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ती है, जो आध्यात्मिक आरती समारोह और शहर को जादुई माहौल में घेरने वाली रोशनी के मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रदर्शन को देखने के लिए उमड़ पड़ते हैं।

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पश्चिम की ओर बढ़ते हुए राजस्थान में जयपुर जिसे गुलाबी नगर के नाम से भी जाना जाता है, दिवाली के दौरान एक चकाचौंध भरे नज़ारे में बदल जाता है। रोशनी और सजावट की लड़ियां शहर को घेर लेती हैं, साथ ही आमेर किला चमकीले रंगों में चमकता है। त्यौहार की भावना से सराबोर, चहल-पहल भरे बाज़ार पारंपरिक चीजों और मिठाइयों से लेकर खूबसूरती से तैयार किए गए दीयों तक सब कुछ प्रदान करते हैं। जयपुर की भव्यता और समृद्ध परंपराएं यहां दिवाली के उत्सव को वास्तव में बहुत शानदार बनती है।

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पंजाब के अमृतसर में दिवाली का एक अलग ही अनुभव मिलता है, जिसमें सिख परंपराओं और उत्सव की भावना का मिश्रण देखने को मिलता है। सिख धर्म के प्रतीक स्वर्ण मंदिर को शानदार ढंग से रोशन किया जाता है, और इसके सुनहरे रंग आसपास के पानी में दिखाई देते हैं। शहर का आसमान आतिशबाजी के रंगों से भर जाता है, जबकि सड़कें स्वादिष्ट पंजाबी मिठाइयों का लुत्फ उठाने वाले लोगों की खुशी से जगमगा उठती हैं।

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पूर्व में पश्चिम बंगाल का कोलकाता भव्य काली पूजा के साथ दिवाली के उत्सव में अपना अलग स्वाद जोड़ता है। शहर देवी काली की कलात्मक मिट्टी की मूर्तियों से बेहद ही खूबसूरत और उत्सवी माहौल बना हुआ है। ढाक, पारंपरिक ढोल की आवाज़ और बंगाली मिठाइयों की खुशबू हवा में भर जाती है, जो कोलकाता के रोशनी के त्योहार के उत्सव को अच्छा बनाती है।