Dividend Profit: शेयर बाजार में टैरिफ वॉर के चलते जोरदार हलचल है. पहले अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 तक लगातार 5 महीनों तक बिकवाली देखने को मिली. फिर मार्च में खरीदारी से वापस रौनक देखने को मिला. लेकिन अप्रैल के शुरू होते ही रेसिप्रोकल टैरिफ ने सेंटीमेंट बिगाड़ दिया. नतीजतन, एक बार फिर ताबड़तोड़ बिकवाली लौट आई है.
भारतीय शेयर बाजार का परफॉर्मेंस फाइनेंशियल ईयर 2025 में पॉजिटिव रहा. FY25 में मार्केट ने 5.3% तक का रिटर्न दिया. दरअसल, पहली छमाही में मार्केट में धुआंधार तेजी रही, जिसमें सितंबर में रिकॉर्ड हाई बना. फिर बाजार में हाई वैल्युएशंस, कमजोर अर्निंग्स, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता से भारी करेक्शन दिखा. हालांकि, इस बीच डिविडेंड से शेयरहोल्डर्स की तगड़ी कमाई हुई, जिसमें भारत सरकार का नाम भी शामिल है.
डिविडेंड से सरकार की झमाझम कमाई!
सरकारी कंपनियों के डिविडेंड से सरकारी खजाने में भारी रकम जमा हुई है. DIPAM सेक्रेटरी अरुनीष चावला ने बताया कि FY25 में CPSEs ने डिविडेंड के तौर पर 1.5 लाख करोड़ रुपए सरकार को दिए. कुल 10% मार्केट कैप पर करीब 25% CPSEs ने डिविडेंड बांटे हैं.
उन्होंने कहा कि फंड मैनेजर्स को हम सलाह दे रहे हैं कि वे अपने पोर्टफोलियो में सरकारी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों को शामिल करें. साथ ही PSE वेल्थ क्रिएशन में माइनॉरिटी शेयरहोल्डर, सीनियर सिटीजन्स और कॉमन इनवेस्टर्स भी हिस्सा बनें. साथ ही हम प्राइवेट कॉरपोरेट्सपर भी दबाव बना रहे कि वे माइनोरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए डिविडेंड की मंजूरी दें. हमें मिलकर शेयर मार्केट को आम आदमी के लिए एक बेहतर जगह बनाने के लिए काम करना चाहिए.
ये कंपनियां सरकार को देती हैं डिविडेंड
भारत सरकार को डिविडेंड से जमकर कमाई होती है. ये डिविडेंड सरकारी कंपनियों की तरफ से आता है. तगड़े डिविडेंड बांटने वाली सरकारी कंपनियों में कोल इंडिया, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान जिंक, ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन, टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स (इंडिया) जैसे नाम शामिल हैं.
डिविडेंड क्या होता है?
डिविडेंड कंपनी की आय का एक हिस्सा होता है, जो उसके शेयरधारकों को बांटा जाता है. बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स डिविडेंड की रकम तय करता है और शेयरहोल्डर्स को पात्र होने के लिए एक्स-डिविडेंड से पहले स्टॉक का ओनरशिप होना चाहिए. डिविडेंड कैश या अतिरिक्त शेयरों के रूप में जारी किया जा सकता है. सार्वजनिक कंपनियां निवेशकों को उनके फाइनेंशियल सपोर्ट को सपोर्ट के लिए रिकॉर्ड करने के लिए डिविडेंड का इस्तेमाल करती हैं, जो अक्सर कंपनी के शेयर प्राइस को प्रभावित करता है.
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