नयी दिल्ली। भारत में डिजिटल पेमेंट के मामले में कोरोनावायरस ने वो काम कर दिया जो 4 साल पहले की गई नोटबंदी में नहीं हो पाया था। दरअसल कोरोना संकट के दौरान डिजिटल पेमेंट में काफी बढ़ोतरी हुई। डिजिटल भुगतान का उपयोग किराने का सामान, बिजली के बिल और कैब के किराए तक के लिए किया जा रहा है। 2016 में भारत के सबसे बड़े बैंकों द्वारा तैयार किए गए प्लेटफॉर्म यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) पर लेनदेन का मूल्य पिछले महीने अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। असल में कोरोना के डर से लोग करेंसी नोटों के इस्तेमाल से बच रहे हैं। बैंकों से इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर, जिसमें आर्थिक गतिविधियों में कमी के चलते अप्रैल में गिरावट आई थी, में भी फिर से तेजी देखी गई। एक तकनीकी कंपनी की सीईओ कहते हैं कि जिन लोगों ने कभी बिल का भुगतान ऑनलाइन नहीं किया वे भी ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं और जिन लोगों ने कभी ऑनलाइन किराने का सामान नहीं खरीदा वे इसे ऑनलाइन खरीद रहे हैं। मोदी सरकार लंबे समय से भारत में डिजिटल भुगतान को बढ़ाने के प्रयास कर ही है।
बता दें कि तीन-चौथाई भारतीय उपभोक्ताओं ने वायरस के संकट के बाद से डिजिटल भुगतान के अधिक उपयोग की बात कही। 78% अगले पांच महीनों में डिजिटल पेमेंट को जारी रखने की उम्मीद करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल कहा था कि उसका लक्ष्य 2021 तक डिजिटल लेनदेन को लगभग 10% से बढ़ाकर लगभग 15% करने का है। सरकार का भी रोजाना एक अरब डिजिटल लेनदेन का लक्ष्य है क्योंकि दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ते स्मार्टफोन बाजार यानी भारत में उपभोक्ता एक बटन के क्लिक पर लेनदेन कर सकें। अमेजन और अल्फाबेट जैसे ग्लोबल टेक दिग्गज भारत के डिजिटल-भुगतान बाजार पर दांव लगा रहे हैं, जिसके 2023 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इनका मुकाबला पेटीएम और जल्द शुरू होने वाले फेसबुक के व्हाट्सऐप पे से है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार भारतीय डिजिटल पेमेंट प्रति व्यक्ति 2015 से 2018-19 में 5 गुना तक बढ़ गए। हालांकि ये अब भी चीन से काफी नीचे है, जहां 2017 में प्रति व्यक्ति 96.7 कैशलेस लेनदेन रिकॉर्ड हुई। दूसरी बात कि भारत में अभी भी नकदी के लिए पारंपरिक लगाव को दूर करने में काफी समय लग सकता है। देश में अब भी डिजिटल के मुकाबले कैश का बोलबाला काफी अधिक है। एटीएम से निकाली गई नकदी की मात्रा के मामले में भारत चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। वहीं करेंसी सर्कुलेशन के मामले में (जीडीपी का 11.2 फीसदी) भारत का पहला नंबर है। इसका एक कारण यह है कि भारत की केवल एक तिहाई आबादी के पास इंटरनेट है। इसके अलावा 20% भारतीयों के पास बैंक खाता नहीं है, जो कार्ड से लेनदेन के लिए अड़चन है।
भारत में लगे लॉकडाउन के पहले सप्ताह के दौरान कुल डिजिटल भुगतान में गिरावट आई। उस समय अधिकांश कारोबार बंद हो गए थे। मगर फिर भी जरूरी चीजों के लिए डिजिटल पेमेंट में बढ़ोतरी देखी गई, जिनमें किराना, फार्मेसी, मोबाइल टॉप-अप और यूटिलिटी पेमेंट शामिल हैं। छोटे शहरों में भी वायरस ने डिजिटल भुगतान अपनाने की स्पीड को तेज किया है और संपर्क रहित भुगतान सॉल्यूशन के लिए कारोबारियों के लिए मांग बढ़ी है।
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