नयी दिल्ली। कहा जाता है कि जीवन में कभी भी मुश्किल समय आए तो हार नहीं माननी चाहिए। मुश्किल समय में डटे रह कर हालात का सामना करना चाहिए, क्योंकि इसी से आगे की राह निकलती है। एक ऐसी ही कामयाबी की मिसाल कायम की एक 27 वर्षीय लड़की ने। मेरठ की रहे वाली इस लड़की ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। मगर कामयाबी नहीं मिली। मुश्किल समय आया तो इसने कुछ अलग करने की सोची। उसकी तरकीब काम कर गई और वे आज हर महीने लाखों रु की कमाई कर रही हैं। इस लड़की ने जो काम किया उसी की वे दूसरों को भी ट्रेनिंग दे रही हैं और वो भी मुफ्त। आइए जानते हैं पूरी कहानी।
वनइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मेरठ की रहने वाली पायल अग्रवाल ने पढ़ाई खत्म करने के बाद कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी की। 2 साल तक मेहनत और कोशिश करने के बाद भी उन्हें कामयाबी नहीं मिली। सरकारी नौकरी पाने के प्रयास में उनकी प्राइवेट नौकरी भी चली गई। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक नए रास्ते की तलाश शुरू कर दी। उन्होंने कम लागत वाले बिजनेस की तलाश की। यूट्यूब के जरिए उन्हें वर्मी-कम्पोस्ट (केंचुआ खाद) की जानकारी मिली और वे इसी में आगे बढ़ती गईं। असल में उन्होंने 22 साल की आयु में ही गमलों के लिए केंचुए से जैविक खाद बनानी शुरू कर दी थी। बाद में उन्होंने इसी को अपना प्रोफेशन बनाया।
उन्होंने इस काम में इतनी महारत हासिल कर ली कि अब उनकी मासिक इनकम 1.5-2 लाख रु तक है। यूट्यूब से केंचुए से वर्मी कम्पोस्ट बनानी सीख कर उन्होंने खुद तो पैसा कमाया ही, साथ ही बहुत से दूसरे लोगों को भी रोजगार दिया। उन्होंने हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, अलीगढ़, बरेली, महाराष्ट्र, आगरा, कश्मीर, जामनगर आदि में किसानों के लिए वर्मी कम्पोस्ट की यूनिट तक लगवाई है और वे इस चीज के लिए किसी से पैसे नहीं लेतीं। पायल के पास कौशल रखने वाले कामगार हैं। जहां यूनिट लगनी होती है वहां उनका कोई कामगार जाकर ट्रेनिंग देता है। बाकी वे खुद ऑनलाइन वीडियो के जरिए लोगों को सलाह देती हैं।
शुरुआत में पायल के पास जमीन नहीं थी। उन्होंने जमीन किराये/पट्टे पर ली। अच्छी बात ये है कि इस जैविक खाद के लिए जमीन चाहे बंजर भी हो तो भी काम हो सकता है। बंजर जमीन पर कम किराए को देखते हुए पायल ने डेढ़ एकड़ बंजर जमीन पट्टे पर ली। परिवार से थोड़ी आर्थिक मदद लेकर उन्होंने काम शुरू किया। उन्होंने वर्मी कंपोस्ट के 30 बेड से शुरुआत की। उन्होंने पानी का इंतजाम, काली पॉलीथिन, एक जरनेटर और खाद बनाने संबंधी औजार खरीदे।
पायल के अनुसार खाद के लिए एक बेड तैयार करने में 8500 रु तक खर्च आता है। 30 फीट लंबे और 4 फीट चौड़ाई वाले ऐसे बेड में 300 रु की पॉलीथिन लगेगी। साथ ही 30 किलो केंचुए और 1500 किलो गोबर की जरूरत पड़ती है। उन्होंने 26 बेड से शुरुआत की थी, जिसमें 2 लाख रु का खर्चा आया था। पहले साल उन्होंने लागत के बराबर ही कमाया। उन्हें नुकसान नहीं हुआ इसलिए हिम्मत बढ़ी। इस समय उनके पास 200 बेड हैं, जिनसे वे हर महीने 20-25 टन तैयार करती हैं।
वे अब 3 एकड़ जमीन तलाश रही हैं। जहां उनका इरादा 500 बेड लगाने का है। वे कहती हैं कि इस कारोबार के लिए किसी खास कौशल की जरूरत नहीं है। कोई भी व्यक्ति इसे शुरू कर सकता है।
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