Go First : एयरलाइन कंपनी गो फर्स्ट की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने गो फर्स्ट को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से और हवाई टिकटों की बिक्री को बंद करने को कहा है।
भारतीय विमानन नियामक की तरफ से एयरलाइन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और पूछा गया है कि उड़ानों के संचालन में उसकी विफलता को देखते हुए उसके लाइसेंस को क्यों न रद्द कर दिया जाए।
कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए डीजीसीए ने गोफर्स्ट को 24 नई तक का वक्त दिया है। जिसके बाद नियामक के द्वारा गो फर्स्ट के एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट निर्णय लिया जाएगा।
डीजीसीए की तरफ से गो फर्स्ट को भेजे नोटिस में यह पूछा गया है कि सेफ, कुशल और विश्वसनीय तरीके से संचालन जारी रखने में विफलता के वजह से उसके एओसी को क्यों नहीं रद्द की जाना चाहिए।
डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि गो फर्स्ट के द्वारा दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत अचानक उड़ानों को रद्द कर देने और कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रोसेस को शुरू करने के मद्देनजर डीजीसीए की तरफ से प्रासंगिक प्रावधानों विमान रूल 1937 के एक सुरक्षित, कुशल और विश्वसनीय तरीके से सेवा के संचालन को जारी रखने में उनकी विफलता के वजह के तहत गो फर्स्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
8 मई को एयरलन ने अपनी वेबसाइट और मेकमायट्रिप आदि जैसे जो ऑनलाइन ट्रैवल टिकट प्लेटफॉर्म है। इन प्लेटफॉर्म पर भी टिकट की बिक्री बंद कर दी।
3 मई से गो फर्स्ट ने सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है और इसके साथ ही स्वैच्छिक दिवालिया कार्यवाही को शुरू करने के लिए एनसीएलटी के साथ एक याचिका दायर की है।
8 मई को रुकी हुई घरेलू वाहक ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल से स्थगन के लिए अपनी याचिका पर एक आदेश में तेजी करने के लिए कहा।
एयरलाइन जो आर्थिक से जूझ रही है इस एयरलाइन ने अर्जेंसी का हवाला दिया है। क्योंकि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने 4 मई को अपने आदेश सुरक्षित रख लिया था।
गो फर्स्ट की तरफ से एनसीएलटी को बताया कि उसको लेसर्स ऑफ टर्मिनेशन का नोटिस प्राप्त हुआ है और इस मामले को डीजीसीए को भी ट्रांसफर किया है।
जब एनसीएलटी की तरफ से इस मामले को अपने कब्जे में ले लिया तो पट्टेदारों ने कब्जा करना शुरू कर दिया। कंपनी की तरफ से ट्रिब्यूनल को बताया गया है कि हमे मेंटेनेंस के कार्य के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।
गो फर्स्ट को तरफ से 2 मई को ट्रिब्यूनल के समक्ष एक याचिका दायर की गई। इस याचिका में एयरक्राफ्ट पत्थरों को किसी भी वसूली को कार्यवाही करने से रोकने के साथ डीजीसीए और जरूरी वस्तुओं और सर्विस के आपूर्तिकर्ताओं को प्रतिकूल कार्रवाई को शुरू करने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।
इसके अलावा एक और अनुरोध किया कि डीजीसीए, एएआई और निजी हवाईअड्डा संचालकों को कंपनी को आवंटित किसी भी डिपार्चर और पार्किंग स्लॉट को रद्द नही करना चाहिए।
इतना ही नहीं एयरलाइन यह भी चाहती है कि ईंधन के लिए जो आपूर्तिकर्ता है। वे विमान संचालन के लिए आपूर्ति जारी रखें साथ ही वर्तमान कॉन्ट्रैक्चुअल अरेंजमेंट्स को समाप्त न करें।
11 हजार 463 करोड़ रु की देनदारी और फाइनेंशियल संकट के साथ, वाडिया ग्रुप के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने स्वैच्छिक दिवाला समाधान कार्यवाही के साथ-साथ फाइनेंशियल दायित्व पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की है।
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