RBI: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि 2,000 रूपये के नोट को वापस लेने के आदेश के 1 महीने के अंदर ही दो तिहाई के ज्यादा दो हजार रु के नोट सिस्टम में वापस आ गए हैं।

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क्लीन नोट पॉलिसी के एक हिस्से के रुप में 19 मई को आरबीआई ने करीब 3.62 लाख करोड़ रूपये मूल्य के 2 हजार रु के नोटों को वापस लेने का आदेश दिया था।

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8 जून को फाइनेंशियल ईयर की दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करते हुए आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास की तरफ से कहा गया था कि 2 हजार रु के करीब 1.8 लाख करोड़ रु मूल्य के नोट वापस आ गए हैं, 31 मार्च तक जो प्रचलन में करीब 50 प्रतिशत नोट थे। जिनमें से 85 फीसदी जमा में थे और बाकी विनिमय में थे।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरबीआई गवर्नर ने पिछले हफ्ते एक मीडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि अब वापस लिए गए 2000 के 3.62 लाख करोड़ (31 मार्च 223 तक) नोटों में से दो तिहाई या 2.41 लाख करोड़ से ज्यादा मूल्य के नोट पिछले सप्ताह के मध्य तक सिस्टम में वापस आ गए हैं।

उन्होंने बताया कि सिस्टम में वापस आए कुल पैसे में से 85 फीसदी जमा में है और बाकी मुद्रा विनिमय में है।

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हालाकि, आरबीआई ने विनिमय/जमा कर लिए 30 सितंबर आखिरी तारीख तय किया है। उन्होंने कहा कि समय सीमा कोई पत्थर की लकीर नहीं है। लोगों को अपने पैसे को विनिमय/जमा करने के लिए जल्दबाजी करने की आवश्यकता नहीं है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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आरबीआई और सरकार का अनुमान है कि चालू फाइनेंशियल ईयर में जीडीपी 6.5 फीसदी रहेगी। पहली तिमाही में यह 8.1 फीसदी और उसके बाद की तिमाहियों में इसमें कमी आएगी।

19 मई को रिकॉल ऑर्डर जारी करने और बैंकों को 23 मई से जनता से नोट को इकट्ठा करने के लिए स्पेशल काउंटर खोलने के लिए कहने के साथ साथ आरबीआई की तरफ से यह भी कहा गया था कि मौजूदा 2,000 मूल्यवर्ग के बैंक नोट वैध मुद्रा बने रहेंगे।

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8 नवंबर 2016 की नोटबंदी के कुछ दिनों के बाद 2000 रूपये के नोट को पेश किया गया था। 2,000 रु के नोटों में से करीब 89 फीसदी नोट मार्च 2017 से जारी किए गए थे। आरबीआई ने वर्ष 2018-19 में ही 2,000 रु के नोटों की छपाई बंद कर दी गई थी।