नयी दिल्ली। बुधवार को 5 फीसदी की गिरावट के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में गुरुवार को भी हल्की गिरावट आई है, जिससे इसके दाम 40 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए हैं। इसके पीछे की वजह अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्रीज का रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना और कोरोना मामलों की बढ़ती संख्या के चलते मांग में बढ़ोतरी को लेकर संदेह है। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (ईआईए) के अनुसार अमेरिकी क्रूड स्टॉक 14 लाख बैरल बढ़ कर रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जिससे क्रूड की कीमतों को झटका लगा है। इसके अलावा गैसोलीन भंडार में गिरावट भी एक वजह मानी जा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अच्छी बात यह है कि तेल की खपत अच्छी स्थिति में है।

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क्या है मौजूदा भाव
ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 19 सेंट्स या 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ 40.12 डॉलर प्रति बैरल पर हैं, जबकि इसका सबसे निचला लेवल 39.47 डॉलर प्रति बैरल रहा है। बुधवार को ग्लोबल बेंचमार्क 5.4 फीसदी गिरा था। यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 49 सेंट या 1.3 प्रतिशत गिर कर 37.52 डॉलर पर आ गया। बता दें कि कोरोना मामलों की संख्या में बढ़ोतरी से ऑयल और इक्विटी बाजार दोनों पर ही दबाव पड़ा है। बढ़ते कोरोना मामलों के मद्देनजर ऑयल और इक्विटी दोनों जगह चिंता बढ़ी है।

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ऑयल की मांग पर पड़ेगा असर
कोरोनोवायरस के संक्रमित मामलों में फिर से बढ़ोतरी से तेल की मांग पर दबाव बढ़ेगा, जिसमें कुछ स्थानों पर लॉकडाउन में ढील और आर्थिक वृद्धि के लिहाज से बढ़ोतरी देखी गई है। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बुधवार को पहले के मुकाबले और बड़ी वैश्विक मंदी का पूर्वानुमान लगाया है। इसका भी सेंटिमेंट पर बुरा असर पड़ा है।

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ओपेक के कदम से मिला सहारा
हालांकि पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (ओपेक) और इसके सहयोगियों द्वारा आपूर्ति में की गई रिकॉर्ड कटौती से तेल बाजार को सहारा मिला है, जो अप्रैल के मुकाबले अधिक मजबूत है, जब ब्रेंट 16 डॉलर प्रति बैरल के 21 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था और अमेरिकी क्रूड निगेटिव हो गया था। निवेशक इंतजार कर रहे हैं कि क्या उत्पादक (ओपेक और इसके सहयोगी) जुलाई के बाद रिकॉर्ड कटौती जारी रखते हैं।

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