Crop Protection Fungicides: किसान भाइयों के लिए हम राहत की खबर लेकर आ गए हैं। अगर आप इस बात से परेशान रहते हैं कि धान की फसल में बार-बार कीड़े लग रहे हैं जिसके कारण धान खराब हो रहा है तो आपको बता दें कि बाजार में दो नए फंगीसाइड आ गए हैं। इसकी मदद से आप धान को रोगों से बचाने में आपको मदद मिलेगी। चलिए इनके बारे में आपको बताते हैं।
इस कंपनी ने फसल सुरक्षा के लिए उठाया कदम
सिंजेन्टा इंडिया ने चावल और टमाटर के साथ-साथ कई फसलों के लिए फसल सुरक्षा उत्पाद पेश किए हैं। सिंजेन्टा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड दुनिया की अग्रणी कृषि कंपनियों में से एक है। इसमें सिंजेन्टा क्रॉप प्रोटेक्शन और सिंजेन्टा सीड्स भी शामिल हैं।
सिंजेन्टा के अनुसार, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए 'मिराविस-आर डुओ और रिफ्लेक्ट-आर टॉप फसल सुरक्षा उत्पाद पेश किए गए हैं। मिराविस-आर डुओ एक अत्याधुनिक कवकनाशी है जिसे टमाटर, मिर्च , मूंगफली और अंगूर में उपयोग के लिए मंजूरी दी गई है।
इन बीमारियों पर रहेगा नियंत्रण
यह उत्पादन पाउडरी मिल्ड्यू , एन्थ्रेक्नोजऔर लीफ स्पॉट जैसी बीमारियों पर नियंत्रण प्रदान करता है, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली उपज सुनिश्चित होती है।
कंपनी ने ये भी जानकारी दी है कि दुनियाभर में किसान हर साल फफूंद जनित बीमारियों के कारण अपनी फसल का 23 फीसदी तक खो देते हैं। इससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। Miravis®Duo फसलों को मजबूत और विश्वसनीय रोग सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे उत्पादकों को बेहतर गुणवत्ता वाली उपज मिलती है, जिसके चलते निवेश पर मिलने वाले फायदे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है।
दूसरा उत्पाद 'रिफ्लेक्ट-आर टॉप' चावल के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया एक कवकनाशी है, जो भारत में मुख्य भोजन है। यह शीथ ब्लाइट के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे लंबे समय तक रोग नियंत्रण सुनिश्चित होता है और फसल को मजबूत आधार मिलता है। इससे फसल जल्दी-जल्दी खराब भी नहीं होती हैं।
टमाटरों को इस प्रकार मिलेगी अधिक सुरक्षा
फएमसी इंडिया ने अनुसंधान-आधारित कीटनाशक कॉरप्रिमाTM लॉन्च करने की घोषणा की थी। एफएमसी की दुनिया की अग्रणी रिनेक्सिपियर® कीट नियंत्रण प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित, कॉरप्रिमाTM भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बने फ्रूट बोरर के खिलाफ बेहतर फसल सुरक्षा प्रदान करेगा।
देश भर के टमाटर किसानों को हर साल फ्रूट बोरर के कारण उपज का 65 प्रतिशत तक नुकसान सहना पड़ता है। इससे परिणामस्वरूप खराब गुणवत्ता वाले फल प्राप्त होते हैं।
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