Credit Suisse Crisis : क्रेडिट सुइस ने गुरुवार को कहा कि यह स्विस सेंट्रल बैंक से 54 अरब डॉलर का कर्ज लेगा, ताकि अपनी लिक्विडिटी मजबूत कर सके। लिक्विडिटी को मजबूत करने के लिए यह "निर्णायक कार्रवाई" कर रहा है। दरअसल इसके शेयर में गिरावट के बाद बैंक में डिपॉजिट संकट की आशंकाएं तेज हो गईं। इस स्विस बैंक की समस्याओं ने निवेशकों और रेगुलेटर्स का ध्यान अमेरिका से यूरोप की ओर मोड़ दिया। इससे पहले हाल ही में अमेरिका में दो बैंक बंद हुए हैं। क्रेडिट सुइस के सबसे बड़े निवेशक ने कहा कि यह रेगुलेटरी बाधाओं के कारण इसे और अधिक फाइनेंशियल मदद नहीं दे सकता। इसके बाद क्रेडिट सुइस सहित बैंक शेयरों में बिकवाली देखने को मिली है।

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बढ़ रहा बैंकिंग संकट
क्रेडिट सुइस को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच रेगुलेटर्स प्राइवेट बैंकिंग क्षेत्र को लेकर निवेशकों की चिंताओं को कम करने के उपाय करना चाहते हैं। असल में पिछले हफ्ते अमेरिका के सिलिकन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक के बंद होने से एशियाई शेयरों में गुरुवार को और भी अधिक गिरावट आई। इससे पहले अमेरिकी बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गयी। यूरोपीय सेंट्रल बैंक की बैठक से पहले मार्केट में चिंता बरकरार है। निवेशक सोना, बॉन्ड और डॉलर खरीद रहे हैं।

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बयान से मिली राहत
हालांकि क्रेडिट सुइस के 54 अरब डॉलर का कर्ज लेने के बयान से निवेशकों को थोड़ी राहत मिली है। क्रेडिट सुइस ने कहा है कि वह स्विस नेशनल बैंक से 50 बिलियन स्विस फ़्रैंक (54 बिलियन डॉलर) तक उधार लेने के अपने ऑप्शन का इस्तेमाल कर रहीा है। निवेशकों का ध्यान अब बैंकिंग सिस्टम में विश्वास बहाल करने के लिए केंद्रीय बैंकों और एशिया के अन्य रेगुलेटर्स की तरफ से की जाने वाली किसी भी कार्रवाई पर है।

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2008 के बाद फिर गहराया संकट
क्रेडिट सुइस 2008 के वित्तीय संकट के बाद से इस तरह की लाइफलाइफ (54 अरब डॉलर का कर्ज) पाने वाला पहला प्रमुख वैश्विक बैंक होगा। हालांकि केंद्रीय बैंकों ने कोरोनोवायरस महामारी सहित बाजार में संकट के समय बैंकों को लिक्विडिटी दी है। पिछले हफ्ते पहले सिलिकॉन वैली बैंक और उसके दो दिन बाद सिग्नेचर बैंक के बंद होने से इस सप्ताह वैश्विक बैंक शेयरों में उतार-चढ़ाव की स्थिति रही है। मगर निवेशकों के बैंक शेयरों से बाहर निकलने से फाइनेंशियल सिस्टम के लिए एक बड़े खतरे की आशंका पैदा हो गई है।