नयी दिल्ली। सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मई के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी नहीं किए हैं, जिसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापा जाता है। इसी तरह अप्रैल के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के संदर्भ में मापे जाने वाले फैक्ट्री प्रोडक्शन डेटा भी नहीं जारी किया गया है। हालांकि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में बताया गया कि मई महीने में देश का उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (खाद्य महंगाई दर या सीएफपीआई) साल दर साल 9.28 प्रतिशत बढ़ी। सीएफपीआई ग्रामीण क्षेत्र में 9.69 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 8.36 फीसदी रही। बता दें कि इससे एक साल पहले यानी मई 2019 में सीएफपीआई 1.83 फीसदी रही थी।

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आईआईपी में भारी गिरावट
लॉकडाउन के चलते भारत के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) ने अप्रैल में कम से कम दो दशकों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी। औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक अप्रैल में सालाना 55.5 फीसदी घट गया, जो 1996 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। इसकी मार्च के संशोधित 18.3 फीसदी गिरावट के साथ तुलना की गई है। 25 मार्च से लॉकडाउन लागू होने के बाद अधिकांश औद्योगिक क्षेत्र ठप्प पड़े हैं। अप्रैल के दौरान उत्पादित वस्तुओं पर इसका असर पड़ा। कई सेक्टरों में उत्पादन जीरो रहा। इसलिए पिछले महीनों के साथ अप्रैल 2020 के आईआईपी की तुलना करना उचित नहीं है। बाद में जारी किए जाने वाले संशोधित आंकड़ों में इनमें थोड़ा सुधार संभव है। अप्रैल में मैन्यूफैक्चरिंग प्रोडक्स में 64.3 फीसदी, खनन क्षेत्र के प्रोडक्शन में 27.4 फीसदी और बिजली क्षेत्र के प्रोडक्शन में 22.6 फीसदी गिरावट आई।

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लगातार दूसरे महीने पूरे आंकड़े नहीं
बता दें कि सरकार ने लॉकडाउन की वजह से लगातार दूसरे महीने सीपीआई के पूरे आंकड़े जारी नहीं किए हैं। अप्रैल में भी सीपीआई के अधूरे आंकड़े जारी किए गए थे। सरकार की तरफ से साफ किया गया था कि अपर्याप्त डेटा कलेक्शन के कारण अप्रैल के लिए सीपीआई आंकड़े सामान्य नहीं हैं। अप्रैल 2020 के लिए प्राइस डेटा बड़े पैमाने पर निर्दिष्ट आउटलेट से टेलीफोन पर बात करके इकट्ठे किया गया था। प्राइस डेटा आमतौर पर चुनिंदा 1,114 शहरी बाजारों और 1181 गावों से इकट्ठे किए जाते हैं। ये डेटा एनएसओ के फील्ड ऑपरेशंस डिवीजन के फील्ड कर्मचारियों द्वारा व्यक्तिगत यात्राओं के माध्यम से जुटाए जाते हैं।

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