कोल इंडिया के ऑफर फॉर सेल (OFS) में आज रिटेल निवेशकों के पास दांव लगाने का मौका है। इससे पहले संस्थागत निवेशकों (Institutional investors) के लिए खुली बिडिंग में जबरदस्त डिमांड देखने को मिली थी। सरकार इस महारत्न PSU में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचकर अपना राजकोषीय लक्ष्य (fiscal target) पूरा करना चाहती है, जिससे बाजार में शेयरों की लिक्विडिटी भी बढ़ेगी।

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OFS का फ्लोर प्राइस अक्सर मौजूदा मार्केट रेट से कम यानी डिस्काउंट पर रखा जाता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह एंट्री करने का एक शानदार मौका होता है। हालांकि, बोली लगाने से पहले आपको फ्लोर प्राइस और शेयर की पिछली क्लोजिंग की तुलना जरूर कर लेनी चाहिए। आमतौर पर लिक्विडिटी में बदलाव के कारण OFS के दौरान शेयरों में थोड़ी उठापटक देखने को मिलती है।

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coal india ofs floor price and retail rules

सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री में रिटेल निवेशकों को अक्सर थोड़ा डिस्काउंट भी मिल सकता है। आप आज किसी भी प्रमुख स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी बिडिंग कर सकते हैं। ध्यान रहे कि रिटेल कैटेगरी में निवेश की कुल रकम 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह लिमिट इसलिए तय की गई है ताकि छोटे निवेशक बिना किसी बड़े कॉम्पिटिशन के इसमें हिस्सा ले सकें।

विवरणCoal India OFS की खासियतें
निवेशक कैटेगरीकेवल रिटेल निवेशक
बिडिंग विंडोआज मार्केट ऑवर्स के दौरान
इन्वेस्टमेंट लिमिटअधिकतम 2 लाख रुपये

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भारत के एनर्जी सेक्टर की जरूरतों को देखते हुए कोयले की मांग आज भी काफी मजबूत बनी हुई है। कोल इंडिया अपने निवेशकों को तगड़ा डिविडेंड देती है, जो सुरक्षित और रेगुलर इनकम चाहने वालों को काफी पसंद आता है। हालांकि, भविष्य की ग्रीन एनर्जी पॉलिसियों का असर थर्मल कोल उत्पादकों की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर पड़ सकता है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे ऑफर विंडो बंद होने के बाद होने वाले संभावित प्राइस करेक्शन पर नजर रखें।

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इस OFS में पैसा लगाने से पहले अपने पोर्टफोलियो और फाइनेंशियल गोल्स का आकलन जरूर करें। जो लोग हाई डिविडेंड यील्ड की तलाश में हैं, उनके लिए कम फ्लोर प्राइस काफी आकर्षक हो सकता है। बाजार के रुझान को समझने के लिए दिन भर इसके सब्सक्रिप्शन स्टेटस को चेक करते रहें। इस कदम से साफ है कि सरकार अपने विनिवेश (divestment) प्लान को तेजी से आगे बढ़ा रही है।