CLSA on Indian Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में तेजी लौटने की उम्मीदें बढ़ रही हैं. क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों या FIIs की ओर से जारी बिकवाली पर ब्रेक लग सकता है. जाने माने ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने ताजा रिपोर्ट में इस डीटेल्ड दिया है. इसके साथ ही भारत में अपना एलोकेशन भी बढ़ाकर दिया है, जो अब 20% ज्यादा का हो गया है, जबकि चीन में अपना एक्सपोजर कम किया ह. दरअसल, यह स्ट्रैटेजिक बदलाव भारत की स्थिर इकोनॉमिक कंडीशन के साथ-साथ FIIs की वापसी की संभावना की वजह से है. CLSA ने ताजा नोट में बताया कि अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी से ट्रेड वॉर जोर पकड़ सकता है, जिससे चीन को नई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

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CLSA ने बढ़ाया भारत में एलोकेशन

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने नोट में बताया कि चीन के मुकाबले भारत को लेकर पॉजिटिव है. यही वजह है कि एलोकेशन में बढ़ोतरी की है. दरअसल, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच भारत का स्थिर फॉरेन करेंसी इनवायरमेंट इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक ऑप्शन बनाता है. ट्रम्प प्रशासन के तहत ग्लोबल ट्रेड टेंशन के बीच भारत सेफ हेवन के तौर पर देखा जा रहा. सीएलएसए ने मौजूदा व्यापार माहौल में भारत की स्थिर फॉरेक्स रेट और इकोनॉमिक इंडिकेटर्स को प्रमुख लाभ के रूप में उजागर किया.

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हाई वैल्युएशंस के बावजूद भारतीय इक्विटी मार्केट को चाइनीज स्टॉक्स के मुकाबले लॉन्ग टर्म के लिए ज्यादा आकर्षक माना जा रहा है. डीफ्लेशन, प्रॉपर्टी मार्केट में कमजोरी और सुस्त रियल एस्टेट निवेश को लेकर चिंताएं चीन को प्रभावित करती रहती हैं. मनी कंट्रोल से बातचीत में गोल्डमैन सैक्स एसेट मैनेजमेंट के ल्यूक बार्स ने कहा कि हाल ही में 22-23x फॉरवर्ड अर्निंग ने भारतीय बाजारों में मुनाफावसूली को हावी किया.

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चीन की आर्थिक चुनौतियां

सितंबर में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) की ओर से राहत पैकेज का ऐलान किया गया. इसके बावजूद चीन लगातार आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. रियल इंटरेस्ट रेट +2.8% पर हाई बनी हुई है, जिससे आगे की दर कटौती सीमित हो गई है. पॉलिसी मेकर्स ने आगामी महीनों में उपायों को आसान बनाने का संकेत दिया है. दिसंबर इकोनॉमिक वर्क कॉन्फ्रेंस और 'टू सेशंस' जैसे इवेंट्स से अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है.

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हालांकि, देरी और निर्णायक कार्रवाई की कमी से ऑफशोर इनवेस्टर्स की ओर से "Buying Strike" हो सकती है, जिन्होंने पीबीओसी प्रोत्साहन के बाद चीन में अपना निवेश बढ़ाया था. चीन के लिए चुनौतियों में डीफ्लेशन दबाव, कमजोर रियल एस्टेट निवेश और बढ़ी हुई युवा बेरोजगारी शामिल हैं.

भारत में इनवेस्टमेंट ट्रेंड

भारतीय इक्विटी के लिए मजबूत घरेलू डिमांड ने वैल्युएशंस से जुड़ी चिंताओं का मुकाबला करने में मदद की है. साथ ही संभावित विदेशी आउटफ्लो के खिलाफ एक बफर मुहैया किया है. अक्टूबर से घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने भारतीय इक्विटी में 1.07 लाख करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की है. जबकि सितंबर तिमाही में कमजोर अर्निंग और बढ़ती महंगाई की वजह वजह से विदेशी संस्थानों यानी FIIs ने अक्टूबर से अब तक भारतीय इक्विटी में 1.14 लाख करोड़ रुपये की नेट बिक्री की है. सीएलएसए ने कहा कि कई वैश्विक निवेशक भारतीय इक्विटी में अपने निवेश की कमी को पूरा करने के लिए सुधार का इंतजार कर रहे हैं.

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भारत के लिए संभावित जोखिम

भारतीय इक्विटी के लिए रिस्क अभी भी हैं. सीएलएसए ने भारत में नए स्टॉक जारी करने की हाई वॉल्युम की ओर इशारा किया, जो पिछले साल मार्केट कैप के 1.5% तक पहुंच गया. यह एक ऐसा लेवल है जिसे ब्रोकरेज फर्म ने संभावित टिपिंग पॉइंट माना है. अगर सप्लाई डिमांड से आगे बढ़ती रही तो नए शेयरों की आमद से लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है.

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अक्टूबर 2023 में सीएलएसए ने अनुकूल क्रेडिट इन्वायरमेंट और सस्ता रूसी कच्चे तेल से कम एनर्जी कॉस्ट की वजह से भारत को 40% अंडरवेट से 20% ओवरवेट में अपग्रेड किया था. हालांकि, अक्टूबर 2024 तक, उन्होंने भारत की ओवरवेट स्थिति को कम करके अपनी स्ट्रैटेजी को एडजस्ट किया, जबकि वहां बाजार में सुधार के संकेतों के बीच चीन में जोखिम बढ़ाया.