नई दिल्ली। देश और विदेश की कई कंपनियों को आखिरकार मोदी सरकार ने सस्ते और महंगे स्मार्ट मोबाइल फोन के प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार की इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जहां मेक इन इंडिया को बढ़ावा दिया है, वहीं देश की कंपनियों को विदेशी कंप्टीशन से बचाने का इंतजाम किया गया है। ऐसे में जहां बहुत ही सस्ते स्मार्ट मोबाइल फोन देश में थोक में बनना शुरू होंगे, वहीं निर्यात के लिए महंगे मोबाइल फोन भी बड़ी मात्रा में बनेंगे। सबसे अच्छी बात है कि इस स्कीम का असर तुरंत ही दिखाई देने लगेगा। कुछ ही समय में यह सस्ते मोबाइल फोन में बाजार में आ जाएंगे।
40 हजार करोड़ रुपये की है यह स्कीम
ऐसे में आइये जानते हैं कि मोदी सरकार की मंगलवार को लांच हुई यह स्कीम क्या है, और चीन के लिए क्यों खतरा साबित होगी। इस स्कीम का हिस्सा जहां एप्पल से लेकर सैमसंग बनीं हैं, वहीं भारत की भी कई कंपनियां भी इस स्कीम से जुड़ गई हैं। आइये जानते हैं कि यह 40 हजार करोड़ रुपये स्कीम है क्या।
जब से चीन के खिलाफ मोदी सरकार सख्त हुई है, रोज कुछ न कुछ कदम उठा रही है। इसी कड़ी में सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) बनाई थी। इस स्कीम के तहत देश और विदेश की कंपनियों को भारत में स्मार्ट मोबाइल फोन बनाने पर कैशबैक दिया जाएगा। इस स्कीम के तहत अब सरकार ने कंपनियों के नाम की घोषणा करते हुए इस स्कीम की शुरुआत कर दी है। इस स्कीम के तहत जहां देश की कंपनियों को 15000 रुपये (करीब 200 डॉलर) तक के मोबाइल फोन बनाने पर 4 से लेकर 6 फीसदी तक का कैशबैक दिया जाएगा। इसके अलावा दुनिया की बड़ी कंपनियों को 200 डॉलर से महंगे मोबाइल फोन भारत में बना कर निर्यात करने पर 4 से लेकर 6 फीसदी तक का कैशबैक दिया जाएगा।
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) से भारत में सस्ते से लेकर महंगे मोाबइल फोन का उत्पादन बल्क में होने लगेगा। जहां 15000 रुपये से कम के मोबाइल फोन बनाने वाली भारतीय कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा होगी, जिससे कंपनियों को कम से कम से रेट पर मोबाइल फोन लाना पड़ेगा। वहीं बड़ी कंपनियां अब चीन से अपना उत्पादन घटाकर भारत से निर्यात बढ़ाने की कोशिश करेंगी। क्योंकि प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई) केवल 5 साल के लिए है तो हर कंपनी चाहेगी की वह ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा ले। ऐसे में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और अच्छे मोबाइल कम रेट पर लांच होंगे।
मोदी सरकार ने 11,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले 16 मोबाइल फोन कंपनियों के प्रस्तावों को मंगलवार को मंजूरी दे दी। सरकार ने उम्मीद जताई है कि अगले 5 साल में करीब 10.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन देश में इस स्कीम के तहत बनाए जाएंगे। इस स्कीम से आईफोन बनाने वाली एपल जुड़ी है। एप्पल जिन 3 कंपनियों से अपने मोबाइल फोन का उत्पादन कराती हैं, उन तीनों कंपनियों फॉक्सकॉन होन हाई, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन को इस स्कीम के तहत शामिल किया गया है। वहीं सैमसंग और राइजिंग स्टार के प्रस्तावों को भी मोदी सरकार ने मंजूर कर लिया है। इसके अलावा देश की कंपनियों लावा, भगवती (माइक्रोमैक्स), पैजेट इलेक्ट्रॉनिक्स (डिक्सॉन टेक्नोलॉजीस), यूटीएल नियोलिंक्स और ऑप्टिमस को इस स्कीम में शामिल किया गया है।
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