Trade War Alerts: अमेरिकी टैरिफ पर कनाडा के बाद चीन ने भी काउंटर किया है. इसके तहत चीन ने 10-15% एक्स्ट्रा टैरिफ का ऐलान किया है. चीनी वित्त मंत्रालय ने 4 मार्च को इसका ऐलान किया है. इसके तहत चीन 10 मार्च से अमेरिका से आने वाले कुछ आइटम पर 10% से 15% तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगाएगा.

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चीन की ओर से एक्स्ट्रा टैरिफ तहत अमेरिकी चिकन, गेहूं, मक्का और कपास पर 15% के रेट से असर पड़ेगा. इसके अलावा सोयाबीन, ज्वार, सूअर का मांस, बीफ, जलीय उत्पाद, फल, सब्जियां और डेयरी उत्पादों पर 10% टैरिफ लगेगा.

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अमेरिकी कंपनियों पर सख्त हुआ चीन

चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने भी 10 अमेरिकी कंपनियों को अविश्वसनीय के रूप में लिस्ट करने का फैसला किया है. ये फर्म मुख्य रूप से डिफेंस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में शामिल हैं. मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाइयों पर अपनी असहमति व्यक्त की और वाशिंगटन से बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के एकतरफा टैरिफ उपाय विश्व व्यापार संगठन के नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हैं और चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापार सहयोग के आधार को कमजोर करते हैं.

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ट्रेड रिलेशनशिप पर पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में मैक्सिको और कनाडा से इंपोर्ट पर 25% टैरिफ लागू किया है. इसके अलावा चाइनीज आइटम्स पर टैरिफ दोगुना होकर 20% हो गया है. जवाब में कनाडाई सरकार ने अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर जवाबी टैरिफ का ऐलान किया है.

कनाडा की प्रारंभिक प्रतिक्रिया में लगभग C$30 बिलियन ($20.6 बिलियन) मूल्य के अमेरिकी सामानों पर 25% टैरिफ लगाना शामिल है. यह न्यूयॉर्क समय के अनुसार मध्यरात्रि से लागू होगा, जब तक कि अमेरिका अपने टैरिफ वापस नहीं ले लेता. अगले फेज में 3 हफ्ते के भीतर C$125 बिलियन वैल्यू के सामानों पर इसी तरह के टैरिफ लागू किए जाएँगे.

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एग्री इंपोर्ट पर असर

मौसमी कारकों और अमेरिकी सोयाबीन पर निर्भरता कम होने के कारण चीन के घरेलू बाजार पर अल्पकालिक प्रभाव कम से कम होने की उम्मीद है. शंघाई बेस्ड कृषि-परामर्शदाता जेसीआई की रोजा वांग ने कहा कि आपूर्ति और मांग के नजरिए से घरेलू बाजार पर अल्पकालिक प्रभाव महत्वपूर्ण नहीं होगा.

हालांकि, टैरिफ बढ़ने के कारण अमेरिका को चीन के जलीय निर्यात को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. तिलापिया निर्यात विशेष रूप से प्रभावित है क्योंकि अब उन पर कुल 45% टैरिफ है, जिससे उन्हें अमेरिकी बाजार में निर्यात करना लगभग असंभव हो गया है.