नई दिल्‍ली: कोरोना महामारी ने चीन की स्थिति को ब‍िलकुल बदल दिया है। एक तरफ इस महामारी ने पूरी दुन‍िया के अर्थव्यवस्था को हि‍ला कर रख द‍िया। वहीं दूसरी ओर चीन की अर्थव्यवस्था के नए आंकड़े सामने आ गए हैं जिनके मुताबिक कोरोना काल में भी चीन की अर्थव्यवस्था को ज्‍यादा झटका नहीं लगा।

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चीन के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक 2019-20 के वित्तीय वर्ष में जीडीपी 2.3 फीसदी रही। चीन की जीडीपी में सुधार तो जरूर हुआ है लेकिन ये 4 दशकों में सबसे कम ग्रोथ रेट है। आंकड़ों की मानें तो 1976 के आर्थिक सुधारों के बाद जीडीपी के मामले में चीन की ये सबसे कम रफ्तार है। महामारी के दौरान अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देश महामारी से परेशान थे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले दिसंबर में समाप्त तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 4.9 प्रतिशत था।

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महामारी के चलते फैक्टरी और दुकानों के बंद रहने से चीन की अर्थव्यवस्था में 2020 की पहली तिमाही के दौरान 6.8 प्रतिशत की गिरावट हुई थी। इसके बाद अगली तिमाही में चीन ने 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। हालांकि, यह पिछले एक दशक में चीन द्वारा हासिल की गई सबसे कम वृद्धि है लेकिन अमेरिका और दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अधिक है। इन देशों ने अभी 2020 के लिए वृद्धि के आंकड़े घोषित नहीं किए हैं, लेकिन इस दौरान उनकी अर्थव्यवस्थाओं में संकुचन निश्चित है।

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चीन की अर्थव्यवस्था जहां 2.3% से बढ़ गई है, वहीं चालू वित्तवर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के सिकुड़ने का अनुमान लगाया गया है। भारत के कई जानकारों का कहना हैं कि इस वित्तवर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। और भारत सरकार के आर्थिक सुधार के जो दावे किए गये हैं, वो सच्चाई से परे है। जानकारों की मानें तो अर्थव्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार जो दावे कर रही है, उस रफ्तार से भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार आ नहीं रहा है। ऐसे में संभव है, कि चालू वित्तवर्ष जो 31 मार्च को खत्म होगा, उस वक्त तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 25% की गिरावट आ जाए।

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