नयी दिल्ली। कोरोनावायरस और लॉकडाउन के बीच आम आदमी के लिए कमाई का एक जबरदस्त मौका आया है। कोरोना संकट के बीच लोगों के कारोबार ठप्प हो गए। बड़ी संख्या में लोगों की नौकरियां चली गईं। ऐसे में ये नया अवसर बहुत फायदेमंद हो सकता है। दरअसल वे लोग जो गाय-भैंस पालते हैं उनके पास इन पशुओं का गोबर बेच कर पैसा कमाने का अवसर आया है। आइये जानते हैं इस शानदार मौके के बारे में।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने गोधन न्याय योजना को हरी झंडी दिखा दी है। राज्य की कैबिनेट ने भी इस योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। गोधन न्याय योजना के तहत पशु पालकों से सरकार गोबर खरीदेगी। पशु पालकों से 2 रु प्रति किलो (टांसपोर्ट शुल्क सहित) के भाव पर गोबर खरीदा जाएगा। इस योजना की शुरुआत 20 जुलाई को आ रहे हरेली पर्व से की जाएगी।
मंत्रिमण्डलीय समिति ने गोठान ग्राम में पशु पालकों से 1.50 रु प्रति किलो के भाव पर गो और भैंस वंशीय पशुओं का गोबर खरीदने का प्रस्ताव रखा था। मगर कैबिनेट की बैठक में गोबर को 2 रु प्रति किलो (ट्रांसपोर्ट शुल्क सहित) खरीदने का फैसला लिया गया। बता दें कि छत्तीसगढ़ में अभी तक 5,300 गोठान मंजूर किए गए हैं। इसमें से ग्रामीण इलाकों में 2,408 और शहरी इलाकों में 377 गोठान तैयार भी हो गए हैं। मालूम हो कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 'गोधन न्याय योजना' के तहत गोबर खरीदने का निर्ण पिछले महीने ही ले लिया था। बाद में इसके लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया, जिसने गोबर खरीदने के रेट को हरी झंडी दिखाई।
अब हम आपको बताते हैं कि राज्य सरकार इस खरीदे गए गोबर का क्या करेगी। राज्य में तैयार किए गए गोठान में गाय और भैंस पशु पालकों से गोठान समितियों के जरिए गोबर खरीदा जाएगा, जिससे वर्मी कम्पोस्ट और अन्य उत्पाद तैयार होंगे। जैविक खेती का विस्तार होगा, ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोगों को रोजगार के मौके मिलेंगे, गौपालन को बढ़ावा और पशु पालकों को आर्थिक फायदा मिलेगा। उनकी इनकम में बढ़ोतरी होगी।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि 'गोधन न्याय योजना' के क्रियान्वयन और निगरानी की पूरी जिम्मेदारी जिला कलेक्टरों को सौंपी गई है। बघेल ने कहा इस योजना के बारे में देश भर में बात की जा रही है। देश भर के अर्थशास्त्री और सामाजिक संगठन इस योजना की निगरानी कर रहे हैं। यह योजना गौवंश को एक लाभदायक वस्तु के रूप में बदल देगी। उन्होंने कहा कि राज्य में पहले से ही तेंदूपत्ता संग्रहण, धान खरीद और समर्थन मूल्य पर लघु वन उपज खरीद के लिए व्यवस्थित प्रोसेस और इन्फ्रास्ट्रक्चर है। आने वाले दिनों में गाय-भैंस के गोबर की खरीदारी भी इसी तर्ज पर की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोठान हमेशा छत्तीसगढ़ की परंपराओं का हिस्सा रहे हैं और अब इन गौशालाओं को आधुनिक रूप देने के साथ-साथ इसे व्यावसायिक रूप देने के उपाय किए जा रहे हैं।
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