नई दिल्ली। आपके बैंक की चेक में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इस बदलाव के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिवर्ज बैंक (आरबीआई) को कहा है। दरअसल कोर्ट में चेक बाउंस के बढ़ते मामले को ध्यान में रखकर कोर्ट ने यह सुझाव दिया है। अगर कोर्ट के सुझाव के हिसाब से यह चेक में यह बदलाव होते हैं तो चेक बाउंस होने के बाद लोगों का बचना कठिन हो जाएगा। अभी तक कई कानूनी कमियों के चलते यह मामले कोर्ट में लम्बे समय तक चलते रहते हैं। कोर्ट चाहता है कि चेक में कुछ अहम बदलाव किए जाएं, जिससे दोषियों को तुरंत सजा दी जा सके। ऐसे में आरबीआई जैसे ही यह बदलाव करता है, उसके बाद अगर किसी ने गलत इरादे से चेक जारी किया तो उसे तुरंत सजा दी जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को चेक में बदलाव का यह सुझाव एक 15 साल पुराने मामले की सुनवाई के दौरान दिया। इस मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एस ए बोबडे और एल नागेश्वर राव की बेंच ने माना है कि चेक बाउंस के मुकदमे एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दर्ज होने वाले इन मुकदमों को निपटाने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाने की जरूरत है। इसलिए, सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले का संज्ञान लेते हुए भविष्य में इसे ‘एनआई अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई' के लिए लगाए जाने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2020 को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कई सुझाव दिए हैं। कोर्ट का उद्देश्य चेक के सुरक्षित इस्तेमाल के साथ ही उसका दुरप्रयोग रोकना भी है। कोर्ट ने यह सुझाव दिए हैं।
- चेक में ऐसा कॉलम हो जिसमें उसके जारी करने का कारण भी लिखा हो।
- चेक में ऐसी व्यवस्था हो, जिससे उसके विवादित होते ही जारी करने वाले और लेने वाले की तुरंत पहचान हो सके।
-चेक के विवाद आने पर पुलिस को तुरंत दोनों पार्टियों के पते और अन्य विवरण उपलब्ध हो सकें।
- चेक पर अकाउंटहोल्डर की ईमेल सहित रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और स्थाई पता जैसी जानकारियां शामिल की जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने जो भी कहा है वह अभी सुझाव हैं। कोर्ट ने यह सुझाव रिजर्व बैंक को दिए हैं। अब रिजर्व बैंक कोर्ट को बताएगा कि क्या पूरे सुझाव माने जा सकते हैं, या कुछ सुझाव माने जा सकते हैं। कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लेकर कार्रवाई में पक्ष बनने के लिए केंद्र सरकार, सभी हाई कोर्ट, राज्यों के डीजीपी, नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी, रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इस समय देशभर में चेक बाउंस के 18 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है गलत चेक देने के आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं होना। शिकायतकर्ता के पास उपलब्ध पते पर आरोपी को कोर्ट की तरफ से नोटिस भेजा जाता है। रजिस्टर्ड डाक, स्पीड पोस्ट के अलावा पुलिस को भी उस पते पर भेजा जाता है, लेकिन आरोपी फिर भी कोर्ट में पेश नहीं होता है। ऐसे में कोर्ट ने बैंकों से कहा है कि वह चेक देने वाले व्यक्ति की जानकारी शिकायतकर्ता और पुलिस को देने के लिए अलग से व्यवस्था बनाएं। आरोपी का ई-मेल एड्रेस, मोबाइल नंबर और सही पता जैसी जानकारी उपलब्ध कराई जाएं, जिससे ऐसे मामलो को जल्द निपटाया जा सके। कोर्ट ने सुझाव दिया है कि सॉफ्टवेयर आधारित ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे आरोपी तक कोर्ट का नोटिस पहुंचाना सुनिश्चित किया जा सके। कोर्ट ने यह भी कहा है कि आरोपी की अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए उसकी संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े कदम उठाए जाने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
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