नई दिल्ली। गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी का विवाद लगता है निपटने वाला है। पहले केन्द्र सरकार ने कहा था कि वह इस वक्त जीएसटी क्षतिपूर्ति देने में असमर्थ है। लेकिन अब केन्द्र सरकार ने तय किया है कि वह बाजार से उधार लेकर राज्यों की जीएसटी के नुकसान की क्षतिपूर्ति करेगी। इस काम के लिए केन्द्र सरकार बाजार से 1.1 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेगी। इससे पहले केन्द्र ने जीएसटी में कमी की भरपाई के लिए केंद्र ने अगस्त में राज्यों को दो विकल्प दिए थे।
राज्यों को मिले थे ये 2 विकल्प
इससे पहले केन्द्र सरकार ने कहा था कि या तो राज्य आरबीआई द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष सुविधा के जरिये 97,000 करोड़ रुपये कर्ज ले सकते थे। इसके अलावा राज्य बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले सकते थे। वहीं बाद में कुछ राज्यों की मांग के बाद पहले विकल्प के तहत उधार को 97 हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.11 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
किस्तों में होगी भरपाई
वित्त मंत्रालय ने कहा कि विशेष कर्ज व्यवस्था के तहत, सभी राज्यों को जीएसटी में 1.1 लाख करोड़ रुपये की कुल अनुमानित कमी को सरकार उपयुक्त किस्तों में कर्ज के तौर पर लेगी। इससे सरकार के राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं होगा। यह पैसा राज्य सरकारों की पूंजीगत प्राप्ति के रूप में और उनके संबंधित वित्तीय घाटे की फाइनेंसिंग के हिस्से के तौर पर प्रदर्शित होगा। केन्द्र सरकार के इस कदम से राज्यों अलग-अलग कर्ज लेने की दिक्कत से बच जाएंगे। वहीं इससे राज्यों व केन्द्र की जनरल गवर्मेंट बॉरोइंग भी इस कदम से नहीं बढ़ेगी।
राज्यों को करीब 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान
चालू वित्त वर्ष में जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी आने का अनुमान लगाया गया है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति राजस्व में अनुमानित कमी में महज 97 हजार करोड़ रुपये के लिए जीएसटी क्रियान्वयन जिम्मेदार है, जबकि बाकी कमी की वजह कोरोना वायरस महामारी जिम्मेदार है।
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