नयी दिल्ली। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन के अनुसार मौजूदा हालातों के मद्देनजर 2020-21 में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट में रखे गए जीडीपी के 3.5 फीसदी के लक्ष्य से 1.7-1.8 फीसदी अधिक रह सकता है। अगर अनुमान के अनुसार 10 फीसदी नोमिनल जीडीपी ग्रोथ स्थिर रहती है तो इस वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 5.2-5.3 फीसदी रह सकता है। सीईए ने अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी में गिरावट आने की भी बात कही है। सुब्रमण्यन के अनुसार सरकार ने अपनी उधारी के लक्ष्य में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जिससे बजट में रखे गए राजकोषीय घाटे में बढ़ोतरी का अनुमान है। उन्होंने ये भी कहा है कि कोरोना महामारी, लॉकडाउन और इकोनॉमी पर पड़ रहे इनके असर तथा केंद्र की वित्तीय हालत से अन्य अनुमानों की तरह इसमें भी बदलाव हो सकता है।

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कितना लोन लेगी सरकार
केंद्र ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए रखे बजट से 4.2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त लोन लेने का फैसला लिया है। यानी सरकार अब इस वित्त वर्ष में 12 लाख करोड़ रुपये का लोन लेगी। केंद्र सरकार ने राज्यों को उनकी जीएसडीपी के 3 फीसदी के मुकाबले 5 फीसदी तक लोन लेने की मंजूरी दे दी है, जिससे वे अब अतिरिक्त 4.3 लाख करोड़ रुपये का लोन ले सकेंगे।

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कहां तक पहुंच सकता है राजकोषीय घाटा
लोन का इस्तेमाल खर्च और इनकम के बीच अंतर की फंडिंग के लिए किया जाता है। महामारी के कारण केंद्र और राज्यों के राजस्व में कमी और उनके खर्चों को देखते हुए पूर्व सीईए अरविंद सुब्रमण्यन सहित कई एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि सामान्य सरकार (केंद्र और राज्यों) का राजकोषीय घाटा 6 फीसदी के मुकाबले दोहरे अंकों में पहुंच सकता है।

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2019-20 में कितना रहा राजकोषीय घाटा
वित्त वर्ष 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.6 प्रतिशत पर आ गया, जबकि संशोधित अनुमान 3.8 प्रतिशत और बजट अनुमान 3.3 प्रतिशत था। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यह पूछे जाने पर कि अप्रैल-जून तिमाही और 2020-21 में वृद्धि दर कैसी रहेगी? सुब्रमण्यन ने कहा पहली तिमाही में जीडीपी में गिरावट आएगी।