Donald Trump ने इस बार एक ऐसा फैसला लिया, जिसकी चर्चा सिर्फ अमेरिका और Global Economy में नहीं बल्कि भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और पूरे एशिया में हो रही है। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सेना के महत्वपूर्ण कमांड "US Indo-Pacific Command" का नाम बदलकर फिर से "US Pacific Command" कर दिया है। यानी नाम से "Indo" शब्द हटा दिया गया है। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ नाम बदलने की बात है या इसके पीछे कोई बड़ा रणनीतिक संदेश छिपा है?

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आखिर क्या है Indo-Pacific Command?

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US Indo-Pacific Command अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांड में से एक है। यह दुनिया के उस विशाल क्षेत्र की निगरानी करती है जो अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर हिंद महासागर तक फैला हुआ है।

यही वह इलाका है जहां चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ताइवान जैसे कई बड़े देश आते हैं। इसलिए इस कमांड को अमेरिका की एशिया रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।

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2018 में क्यों जोड़ा गया था 'Indo'?

दिलचस्प बात यह है कि 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही Pacific Command का नाम बदलकर Indo-Pacific Command किया गया था।

उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर अब एक-दूसरे से जुड़े हुए रणनीतिक क्षेत्र बन चुके हैं। भारत की बढ़ती ताकत और क्षेत्रीय महत्व को देखते हुए नाम में "Indo" जोड़ा गया था।

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उस फैसले को भारत के लिए एक बड़े सम्मान के तौर पर देखा गया था। दुनिया को यह संदेश दिया गया था कि अमेरिका अपनी एशिया रणनीति में भारत को बेहद अहम मानता है।

अब फिर नाम क्यों बदला गया?

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह सिर्फ पुराने नाम और ऐतिहासिक पहचान को वापस लाने का फैसला है। अधिकारियों के मुताबिक कमांड का काम, जिम्मेदारियां और क्षेत्र पहले जैसे ही रहेंगे। यानी आधिकारिक तौर पर अमेरिका का दावा है कि केवल नाम बदला है, रणनीति नहीं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार नाम भी बहुत कुछ कह जाते हैं।

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भारत और QUAD को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा?

पिछले कुछ वर्षों में "Indo-Pacific" शब्द सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि एक रणनीति बन चुका था। इसी रणनीति के तहत भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग बढ़ा और QUAD को नई ताकत मिली। QUAD को चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने वाले समूह के तौर पर देखा जाता है। इसलिए जब नाम से "Indo" हटाया गया तो कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया। क्या अमेरिका की प्राथमिकताएं बदल रही हैं? क्या भारत की भूमिका पहले जैसी रहेगी? या फिर यह सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव है?

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चीन फैक्टर भी बना चर्चा का विषय

यह फैसला ऐसे समय आया है जब चीन दक्षिण चीन सागर, ताइवान और हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। अमेरिका लंबे समय से अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर चीन के प्रभाव को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में कई विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का प्रतीकात्मक बदलाव लोगों का ध्यान जरूर खींचेगा। हालांकि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि अमेरिका भारत या QUAD से दूरी बनाना चाहता है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

फिलहाल भारत के लिए चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं दिखती। भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई बड़े रक्षा समझौते लागू हैं और संयुक्त सैन्य अभ्यास भी जारी हैं। इसके अलावा QUAD भी पहले की तरह सक्रिय है और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम कर रहा है। यानी जमीन पर फिलहाल कुछ भी बदलता नजर नहीं आ रहा है।

आगे क्या देखना होगा?

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार छोटे दिखने वाले फैसले भी बड़े संकेत देते हैं। इसलिए दुनिया भर के रणनीतिक विशेषज्ञ इस बदलाव पर नजर बनाए हुए हैं। अगर आने वाले समय में अमेरिका की एशिया नीति या QUAD को लेकर कोई नया कदम सामने आता है, तब इस फैसले के असली मायने और साफ हो सकते हैं।

फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि नाम बदलने के इस फैसले ने भारत, QUAD और Indo-Pacific रणनीति को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है। अब सबकी नजर अमेरिका के अगले कदम पर रहेगी।