ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि "अमेरिका ईरान को एक रात में खत्म कर सकता है।"

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यह बयान ऐसे समय में आया है जब इससे पहले ट्रंप ईरान को मंगलवार तक का अंतिम अल्टीमेटम दे चुके थे। हालांकि बातचीत के दरवाज़े अभी भी खुले हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है।

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अमेरिका और इज़राइल सख्त शर्तों के साथ खड़े हैं, जबकि ईरान ने अपनी मांगें साफ रख दी हैं। ईरान का कहना है कि उसे अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी शांति चाहिए। साथ ही, वह यह भी चाहता है कि Strait of Hormuz तभी खोला जाएगा जब जंग पूरी तरह खत्म हो जाए और अमेरिका-इज़राइल की तरफ से भविष्य में हमला न करने की गारंटी मिले। इस बीच, ट्रंप के अल्टीमेटम की टाइमलाइन भी काफी आक्रामक रही है।

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Donald Trump की डेडलाइन

  • 3 मार्च को अमेरिका ने होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा की बात कही
  • 15 मार्च को सहयोगियों को साथ आने के लिए कहा गया
  • 21 मार्च को 48 घंटे में रास्ता खोलने की चेतावनी दी गई
  • 23 मार्च को पांच दिन की मोहलत दी गई
  • 26 मार्च को डेडलाइन 6 अप्रैल तक बढ़ाई गई
  • 4 अप्रैल को ट्रंप ने कहा कि "समय खत्म हो रहा है"
  • 6 अप्रैल को उन्होंने अब तक की सबसे बड़ी धमकी दे दी

इस बढ़ते तनाव का असर सीधे ग्लोबल बाजारों पर दिख रहा है।

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ग्लोबल बाज़ारों पर असर

एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है। जापान का Nikkei 225 करीब 150 अंक गिरा, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index 200 अंक नीचे फिसल गया। साउथ कोरिया का KOSPI भी लाल निशान में कारोबार करता दिखा।

भारतीय बाज़ार में डर?

भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं रहे। ट्रेडिंग के पहले 1 घंटे के दौरान Sensex 73,545.22 पर 561 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया, जबकि Nifty 50 22,774.10 पर करीब 195 अंक गिरा। बैंकिंग सेक्टर का Nifty Bank भी दबाव में रहा और 386 अंक टूट गया।

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अब सवाल यह है कि अगर यह जंग लंबी खिंचती है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? पहले अनुमान था कि FY27 में 14% से 16% की अर्निंग ग्रोथ होगी, लेकिन अब एक्सपर्ट्स 2% से 6% तक की गिरावट की आशंका जता रहे हैं। इसके साथ ही बाजार 20x PE रेशियो पर ट्रेड कर रहा है, जो ऐतिहासिक औसत 15x से ज्यादा है। ऐसे में अर्निंग्स में गिरावट आने पर वैल्यूएशन पर भी दबाव पड़ सकता है।

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Iran-US War: डर या मौका?

हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जंग अप्रैल-मई के बीच खत्म होती है, तो बाजार में 15% से 20% तक का उछाल आ सकता है। फिलहाल निफ्टी अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर से 16% नीचे है और निफ्टी 500 के करीब 65% शेयर 30% से ज्यादा गिर चुके हैं, जो आगे रिकवरी का आधार बन सकते हैं।

ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है - क्या यह गिरावट डर का संकेत है या एक बड़ा मौका? क्योंकि बाजार में सबसे बड़ा मुनाफा अक्सर वहीं बनता है, जहां डर सबसे ज्यादा होता है।