Airlines Crisis: मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात अब सीधे तौर पर आपकी जेब पर असर डालने लगे हैं। खासकर एविएशन सेक्टर (Aviation Sector) पर इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां बढ़ती ईंधन लागत और लंबी उड़ानों ने एयरलाइंस कंपनियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हवाई यात्रा महंगी होने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।

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पिछले एक महीने में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल (Jet Fuel) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, 20 फरवरी को समाप्त हुए हफ्ते में जेट फ्यूल की कीमत $95.9 प्रति बैरल थी, जो 20 मार्च तक बढ़कर $197 प्रति बैरल तक पहुंच गई। यानी महज चार हफ्तों में कीमतों में 105% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो गई है। इस तेजी ने एयरलाइंस कंपनियों के खर्च का संतुलन बिगाड़ दिया है।

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दोहरी मार झेल रहा एविएशन सेक्टर-

एयरलाइंस कंपनियां इस समय दोहरी चुनौतियों से जूझ रही हैं। एक तरफ ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में एयरस्पेस बंद होने के कारण विमानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे ईंधन की खपत बढ़ रही है और क्रू की लागत भी ज्यादा हो रही है। आमतौर पर किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का करीब 40% हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है, ऐसे में कीमतों में यह उछाल सीधे मुनाफे को प्रभावित कर रहा है।

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एयरलाइंस की सरकार से अपील-

बढ़ती लागत के दबाव में एयरलाइंस कंपनियों ने अब सरकार से राहत की मांग की है। कंपनियों ने एयरपोर्ट पर लगने वाले लैंडिंग और पार्किंग चार्ज कम करने की अपील की है। इसके अलावा टैक्स में भी राहत देने की मांग की गई है, ताकि बढ़ते खर्च को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, भारत के ज्यादातर बड़े एयरपोर्ट निजी कंपनियों द्वारा संचालित हैं, ऐसे में इन मांगों पर सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

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यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ-

इसका सीधा असर अब यात्रियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इंडिगो जैसी एयरलाइंस कंपनियां 'फ्यूल चार्ज' के जरिए पहले ही अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर चुकी हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर टिकट की कीमतें और बढ़ती हैं, तो यात्रियों की संख्या में गिरावट आ सकती है, जिससे एयरलाइंस की कमाई पर और दबाव बढ़ेगा।

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कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का तनाव अब केवल भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर आम आदमी की यात्रा और खर्च पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आने वाले समय में हवाई सफर की लागत किस स्तर तक जाती है, यह काफी हद तक वैश्विक हालात और तेल की कीमतों पर निर्भर करेगा।

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