नयी दिल्ली। अपना बिजनेस भला कौन नहीं करना चाहेगा? मगर इसके लिए सही जगह हाथ आजमाना जरूरी है। किस क्षेत्र में अपना बिजनेस शुरू किया जाए ये कई बातों पर निर्भर करता है। इसमें आपकी निवेश करने की क्षमता, आपकी रुचि, आप किस क्षेत्र में रहते हैं औ आपके आस-पास किस चीज की मांग अधिक है, जैसे महत्वपूर्ण फैक्टर शामिल हैं। इन बातों पर ध्यान देकर यदि आप अपना कारोबार शुरू करें तो कामयाबी की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी। कुछ कारोबार ऐसे होते हैं, जिन्हें शुरू करना आसान है। यदि आप ग्रामीण इलाके में रहते हैं तो हम आपको ऐसे ही एक कारोबार की जानकारी देंगे, जिसमें बेहद सीमित संसाधनों की मदद से कमाई की जा सकती है। ये कारोबार ऐसा है, जिसमें कचरे से पैसा कमाया जा सकता है।
तेलंगाना में एक गांव है, जिसके निवासियों ने कचरे से कमाई करने का तरीका ढूंढ लिया है। इस तरीके को फॉलो करके आप भी अपने गांव या आस-पास के ग्रामीण इलाके में कमाई शुरू कर सकते हैं। जिस गांव के लोगों की हम बात कर रहे हैं उसके रहने वालों ने गांव के बाहर एक डंप यार्ड तैयार किया है। इसमें वे गीला और सूखा कचरा डालते हैं।
गांव के सभी लोग इस डंप यार्ड में अपना-अपना कचरा डालते हैं। जो कचरा रिसाइकिल हो सकता है उसे अलग किया जाता है। कुछ कचरा जलने लायक होता है तो उसे जला दिया जाता है। इस जले हुए कचरे की राख को फिर से इस्तेमाल में लाया जाता है। फिर सूखे कचरे को सुखा कर डिकम्पोज किया जाता है। तैयार खाद से कमाई होती है। अभी तक इस तरह गांव वाले 70000 रु कमा चुके हैं। आप भी ऐसी ही पहल से अपना कारोबार या साइड इनकम बिजनेस शुरू कर सकते हैं।
गांव वालों की इस पहले से पर्यावरण को भी फायदा हो रहा है। कचरा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, मगर तेलंगाना के गांववालों कचरे का सही इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण बेहतर हो रहा है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक कचरे से तैयार होने वाली खाद की मांग बहुत अधिक है। दूसरी तरफ ये गांव भी काफी तरक्की कर रहा है। गांव में 32 सीसीटीवी कैमरों के अलावा लोगों को संभोधित करने के लिए 20 स्पीकर हैं।
गांव के सरपंच कसाला मल्ला रेड्डी के अनुसार उन्होंने गांव वालों को कचरा इकट्ठा करने के लिए राजी किया। मगर इस काम में उनके सामने काफी दिक्कतें आईं। गांव वालों को राजी करना काफी मुश्किल रहा। मगर फिर लोग गीला-सूखा कचरा अलग-अलग जमा करने लगे। अब गांव में नियम ये है कि यदि कोई गीला-सूखा कचरा अलग-अलग जमा न करे तो उसका कचरा नहीं लिया जाता।
इस गांव में अंडरग्राउंड ड्रेनज सिस्टम भी तैयार किया जा चुका है। इसके अलावा यहां 40 किलोवाटर का सोलर प्लांट लगाया जाएगा। इसको लेकर भी तैयारियां चल रही हैं। इस गांव में सिर्फ 27 किलोवाट बिजली की ही जरूरत है। अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में पहुंचाया जाएगा। गांव में कई प्लेग्राउंड भी हैं।
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