Budget 2026: आने वाले बजट 2026 को लेकर आम जनता और रियल एस्टेट सेक्टर में काफी उम्मीदें बनी हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार इस बार ऐसा बजट पेश कर सकती है, जो आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के साथ-साथ मध्यम वर्ग को राहत दे। खास तौर पर आवास क्षेत्र को लेकर बड़े फैसलों की संभावना जताई जा रही है।

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किफायती आवास पर क्यों है फोकस

पिछले कुछ सालों में घर बनाने और खरीदने की लागत तेजी से बढ़ी है। जमीन के दाम, निर्माण सामग्री और मजदूरी महंगी होने से फ्लैट की कीमतें भी ऊपर चली गई हैं। इसके बावजूद किफायती आवास की अधिकतम कीमत सीमा लंबे समय से वही बनी हुई है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग सरकारी योजनाओं के दायरे से बाहर हो जाते हैं।

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बड़े शहरों में बढ़ी परेशानी

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में साधारण दो कमरों का फ्लैट भी अब 70 लाख रुपए के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए मकान लेना आसान नहीं रह गया है। कीमत सीमा कम होने के कारण उन्हें सब्सिडी और टैक्स छूट का फायदा नहीं मिल पाता।

सीमा बढ़ाने की मांग क्यों जरूरी

रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर किफायती आवास की कीमत सीमा को 70 से 90 लाख रुपए तक बढ़ाया जाता है, तो ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकेंगे। इससे न सिर्फ खरीदारों को राहत मिलेगी, बल्कि घरों की मांग भी बढ़ेगी, जिससे निर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

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टैक्स नियमों में बदलाव की उम्मीद

बजट 2026 में होम लोन पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर भी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। माना जा रहा है कि सरकार ब्याज पर मिलने वाली कटौती की सीमा बढ़ा सकती है, जिससे नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग पर वित्तीय बोझ कम होगा।

मौजूदा योजनाओं की सीमाएं

फिलहाल सरकारी आवास योजनाओं के तहत लोन पर ब्याज में राहत दी जाती है, लेकिन सख्त शर्तों और कम कीमत सीमा के कारण कई योग्य लोग इससे वंचित रह जाते हैं। नियमों में सुधार से इन योजनाओं का फायदा ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है।

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बजट 2026 से क्या बदलेगा

अगर सरकार बजट 2026 में किफायती आवास की सीमा बढ़ाती है और टैक्स नियमों में राहत देती है, तो इससे लाखों लोगों के घर खरीदने का सपना पूरा होने की राह आसान हो सकती है। साथ ही रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र को भी नई स्पीड मिलने की उम्मीद है।