Budget 2026 Expectation: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट 2026 से हेल्थकेयर सेक्टर को काफी उम्मीदें हैं। एक्सपर्ट्स और उद्योग जगत के दिग्गजों का मानना है कि इस बार सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
मेडिकल सेक्टर में भारत का खर्च
अमेरिका अपनी जीडीपी का लगभग 17 से 18 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है जबकि जापान अपनी जीडीपी का 10 से 11 प्रतिशत मेडिकल सेक्टर पर खर्च करता है। वहीं रूस स्वास्थ्य पर अपनी जीडीपी का करीब 5 से 6 प्रतिशत खर्च करता है। चीन अपनी जीडीपी का 6 से 7 प्रतिशत मेडिकल सेक्टर पर खर्च करता है। इसके मुकाबले भारत स्वास्थ्य पर जीडीपी का केवल 3 से 4 प्रतिशत खर्च करता है।
पिछले बजटों की बात करें तो सरकार ने डिजिटल हेल्थ, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, घरेलू उत्पादन और सस्ती दवाओं पर फोकस बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए करीब 1 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, पिछले वर्ष से लगभग 11 प्रतिशत अधिक था।
हेल्थ सेक्टर की प्रमुख उम्मीदें और एक्सपर्ट्स की राय
1. स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी (GDP का 2.5% लक्ष्य)
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को अपने वादे के मुताबिक स्वास्थ्य खर्च को GDP के 2.5% तक ले जाने के लिए आवंटन बढ़ाना चाहिए। वर्तमान में यह लगभग 1.9% के आसपास है। फिक्की (FICCI) और नैसकॉम जैसे संगठनों ने मांग की है कि बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बजट में कम से कम 15-20% की वृद्धि की जाए।
2. आयुष्मान भारत का विस्तार
- उम्मीद है कि बजट 2026 में आयुष्मान भारत (PM-JAY) योजना का दायरा बढ़ाया जाएगा।
- मिडिल क्लास को कवर: "मिसिंग मिडल" (वे लोग जो न गरीब हैं और न ही कॉर्पोरेट बीमा के दायरे में आते हैं) को इस योजना में शामिल करने की मांग की जा रही है।
- बुजुर्गों के लिए विशेष लाभ: 70 वर्ष से अधिक उम्र के सभी नागरिकों के लिए मुफ्त इलाज की सुविधाओं को और सुदृढ़ किया जा सकता है।
3. मेडिकल डिवाइस और PLI स्कीम
- भारत को 'मेडिकल डिवाइस हब' बनाने के लिए उद्योग जगत ने PLI (Production Linked Incentive) 2.0 की मांग की है।
- टैक्स में छूट: चिकित्सा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कच्चे माल पर सीमा शुल्क (Customs Duty) घटाने की उम्मीद है।
- GST में बदलाव: लाइफ सेविंग दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर GST की दरों को 12% से घटाकर 5% करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
4. रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर जोर
फार्मा सेक्टर चाहता है कि सरकार नई दवाओं की खोज के लिए विशेष फंड आवंटित करे। विशेषज्ञों का मानना है कि इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए रिसर्च खर्च पर 150-200% टैक्स डिडक्शन फिर से शुरू किया जाना चाहिए।
5. मेडिकल इंश्योरेंस और टैक्स लाभ
आम आदमी के लिए उम्मीदें:
- सेक्शन 80D: मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1 लाख) किया जा सकता है।
- एक्सपर्ट व्यू: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 'मदर ऑफ ऑल डील' (India-EU FTA) के बाद मेडिकल टूरिज्म और दवा निर्यात में भारत की भूमिका बढ़ेगी, इसलिए इस बजट में डिजिटल हेल्थ मिशन और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स के आधुनिकीकरण पर बड़ा निवेश देखा जा सकता है।
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