Budget 2026 Expectations: आगामी बजट को लेकर तैयारियां जोरों पर है और इस बजट में किस सेक्टर या वर्ग को क्या मिलेगा, इसे लेकर तमाम तरह के कयास और उम्मीदें लगाई जा रही हैं। लोग अपने-अपने स्तर पर सरकार को सुझाव दे रहे हैं या फिर अपनी मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं।
इसी कड़ी में रियल एस्टेट को लेकर लोग राहत मिलने की उम्मीदें लगा रहे हैं। दरअसल, वर्ष 2025 में देश के आठ प्रमुख शहरों में आवासीय बिक्री में गिरावट दर्ज की गई। रियल एस्टेट सलाहकार प्रॉपटाइगर के अनुसार, इन शहरों में कुल 3,86,365 आवासीय इकाइयां बिकीं, जो 2024 की 4,36,992 इकाइयों से लगभग 12% कम है। खरीदारों की बढ़ती सतर्कता, ऊंची कीमतें और ब्याज दरें इस गिरावट का मुख्य कारण मानी जा रही हैं।
प्रमुख शहरों में कितनी है रियल एस्टेट की डिमांड?
हालांकि, यह बाजार में मांग के पूरी तरह खत्म होने का नहीं, बल्कि ग्राहकों के अधिक सोच-समझकर निवेश करने का महत्वपूर्ण संकेत है। इस मंदी के दौर में भी दक्षिण भारत के शहरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में 2025 के दौरान आवासीय बिक्री 15% बढ़कर 1.33 लाख इकाइयों से अधिक रही।
इन शहरों में आईटी व सेवा क्षेत्र से जुड़े रोजगार, स्थिर आय, और किफायती व मध्य-खंड आवासीय उपलब्धता ने मांग को मजबूती दी। दूसरी ओर, कोलकाता में हल्की बढ़त देखी गई, जबकि मुंबई महानगर क्षेत्र, दिल्ली-एनसीआर, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े बाजारों में बिक्री घटी है।
क्या है एक्सपर्ट की राय?
ऑरम प्रॉपटेक के कार्यकारी निदेशक ओंकार एस. के अनुसार, वर्ष 2025 को केवल मांग में गिरावट के बजाय 'पुनर्संयोजन' का साल मानना चाहिए। उन्होंने बताया कि डेवलपर्स ने आपूर्ति नियंत्रित रखते हुए एक संतुलित रणनीति अपनाई, जिससे बिक्री कम होने पर भी कीमतें स्थिर रहीं।
यह स्पष्ट करता है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद रियल एस्टेट में बुनियादी मजबूती कायम है। आगामी केंद्रीय बजट को लेकर सेक्टर में सकारात्मक उम्मीदें हैं और उद्योग विशेषज्ञ बड़े फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि होम लोन पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ने, स्टांप ड्यूटी में राहत और किफायती व मध्य-आय आवास को प्रोत्साहन मिलने से आवासीय मांग को नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, मेट्रो और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में निवेश से सेक्टर को दीर्घकालिक समर्थन मिलेगा।
रियल एस्टेट इंडस्ट्री मानती है कि नीतिगत स्थिरता और सरल मंजूरी प्रक्रियाएं निवेशकों का भरोसा बढ़ाने में अहम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, एक संतुलित और दूरदर्शी बजट घर खरीदारों के साथ-साथ डेवलपर्स और निवेशकों के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा।
रियल एस्टेट जानकारों का मत है कि नीतिगत स्थिरता और स्पष्टता से घरेलू तथा विदेशी दोनों तरह के निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उनका कहना है कि सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व सरल मंजूरी प्रक्रियाओं से परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित होगी, लागत घटेगी, और पारदर्शिता बढ़ेगी।
गंगा रियल्टी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीरज के. मिश्रा के मुताबिक, रियल एस्टेट देश की आर्थिक प्रगति में अहम है। उन्हें बजट से व्यावहारिक राहत की उम्मीद है, जिसमें होम लोन पर टैक्स डिडक्शन की सीमा बढ़ाना और किफायती आवास को अतिरिक्त प्रोत्साहन देना शामिल है।
उन्होंने जोड़ा कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर निरंतर फोकस से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सेक्टर की ग्रोथ को स्थायित्व मिलेगा। वहीं, त्रेहान ग्रुप के एमडी सरांश त्रेहान का मानना है कि बजट में मध्यम-आय और किफायती आवास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सरांश त्रेहान ने कहा कि स्टांप ड्यूटी में राहत व मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने से परियोजनाओं की रफ्तार तेज होगी। शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी पर निवेश से रियल एस्टेट की मांग को लंबे समय तक समर्थन मिलेगा और घर खरीदने वालों का भरोसा मजबूत होगा।
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