Budget 2026 Expectation: आगामी वित्त वर्ष 2027 के बजट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है, जो 1 फरवरी को पेश होगा। इस बार शिक्षा क्षेत्र को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के उद्देश्यों - गुणवत्ता व भविष्य की तैयारी - हेतु बड़े वित्तीय प्रोत्साहन की उम्मीद है। अनुमान है कि बजट में शिक्षा आवंटन बढ़ने से प्रतिभा विकास और देश के दीर्घकालिक विकास को बल मिलेगा।

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उद्योग जगत का मानना है कि नीतिगत इरादों को जमीनी परिणामों में बदलने हेतु सतत सरकारी निवेश आवश्यक है, विशेषतः शिक्षकों, बुनियादी ढांचे व प्रौद्योगिकी विकास के लिए। पीटीआई रिपोर्ट के अनुसार, जयपुरिया ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन शिशिर जयपुरिया ने एनईपी-2020 की सिफारिशों के अनुरूप उचित बजट की आवश्यकता पर बल दिया।

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कौशल शिक्षा को बढ़ाने पर जोर

जयपुरिया ने कहा कि शिक्षा ही प्रतिभाओं की नींव है। उनकी सबसे बड़ी उम्मीद शिक्षकों के पेशेवर विकास से है, जिससे शिक्षण-अध्ययन के मानक बेहतर होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यक्रमों व संरचित फंडिंग के माध्यम से व्यावसायिक व कौशल-आधारित शिक्षा पर अधिक जोर देने की आशा व्यक्त की, ताकि कक्षा 6-8 के लिए सीबीएसई की अनिवार्य कौशल शिक्षा को समर्थन मिले।

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शिशिर जयपुरिया ने स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर निवेश बढ़ाने का आह्वान किया, जिससे ग्रामीण व छोटे शहरों के स्कूल पिछड़ न पाएं। उन्होंने बजट से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को प्रोत्साहित करने वाली घोषणाओं की भी उम्मीद जताई।

कनाडियन इंटरनेशनल स्कूल, बेंगलुरु की एमडी, श्वेता शास्त्री, शिक्षण गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और नवाचार मजबूत करना महत्वपूर्ण मानती हैं। उनके अनुसार, यदि शिक्षा आवंटन बढ़ता है, तो नए के-12 स्कूल खोलने, बुनियादी ढांचे को सशक्त करने और शहरी-ग्रामीण शिक्षा के अंतर को पाटने में मदद मिलेगी।

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श्वेता शास्त्री का मानना है कि बढ़े हुए आवंटन से सरकारी स्कूलों में सुधार आएगा, जहां अधिकांश बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सभी तक पहुंचाने के लिए प्रौद्योगिकी एकीकरण पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। साथ ही, शिक्षा ऋण पर ब्याज दरों में कमी से वित्तीय दबाव घटेगा और उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ेगी।

डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

यूनिवो एजुकेशन के सीईओ सिद्धार्थ बनर्जी ने जोर देकर कहा कि भारत की युवा आबादी का लाभ उठाने हेतु निवेश कौशल विकास, डिजिटल परिवर्तन तेज करने और संस्थागत क्षमताएं मजबूत करने पर केंद्रित होना चाहिए। उनके अनुसार, डिजिटल बुनियादी ढांचे में निवेश से उच्च-गुणवत्ता वाली ऑनलाइन शिक्षा का विस्तार होगा।

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बनर्जी ने आगे कहा कि अकादमिक और उद्योग की गहरी साझेदारी से पाठ्यक्रम रोजगार-उन्मुख और भविष्य के लिए तैयार रहेंगे। उनका मानना है कि मजबूत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑनलाइन डिग्री कार्यक्रमों को मुख्य धारा में लाएगा, जिससे 2035 तक 50% सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) के लक्ष्य को पाने में मदद मिलेगी और 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।