Defence Sector Budget 2024: आपको बताते चलें की साल 2024 का पहला बजट आने वाला है। इसे 1 फरवरी 2024 को पेश किया जाएगा। इस बजट को लेकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही कह दिया है कि यह अंतरिम बजट होगा और इसमें किसी भी तरह का बड़ा फैसला नहीं लिया जाना है। हालांकि मिल रही जानकारी के मुताबिक इस बजट से डिफेंस सेक्टर को काफी फायदा हो सकता है। सरकारी अधिकारी बता रहे हैं कि इस बजट सत्र में रक्षा क्षेत्र के लिए कुछ बड़े फैसले हो सकते हैं। इस पर रक्षा सचिव ने भी कहा है कि इस बजट सेशन में सरकार का ध्यान डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ाने पर हो सकता है।
एक मीडिया चैनल से एक्सक्लूसिव बातचीत में रक्षा सचिव ने इस बात की जानकारी दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब तक भारत के द्वारा करीब 16000 करोड़ रुपए का डिफेंस एक्सपोर्ट किया जा चुका है। इसे अभी 20000 करोड़ रुपए तकले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। रक्षा मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इसमें प्राइवेट सेक्टर का भी अहम योगदान है।
गौरतलब है कि साल 2024 में सरकार के द्वारा बजट में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए जो भी जरूरी चीजें हैं, उन सबको मुहैया कराया जाएगा। इसके अलावा डिफेंस मिनिस्ट्री के लिए जो जरूरत हैं, उनमें बजट की कोई कटौती नहीं की जाती है। यही कारण है कि लोगों को उम्मीद है कि इस बार के बजट में रक्षा मंत्रालय को पर्याप्त पैसे मिलेंगे भले ही या एक अंतरिम बजट है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतरिम बजट के दौरान सरकार किसी भी तरह का बड़ा फैसला नहीं लेती है। ऐसा तब होता है जब बजट के कुछ दिन बाद ही चुनाव हों। इस बार के लोकसभा चुनाव बजट आने के कुछ महीनो के अंदर ही हो जाएंगे, ऐसे में सरकार सिर्फ जरूरी खर्चों के लिए पैसे निकालने के लिए बजट जारी करती है। हालांकि कई ऐसे हम मामले भी है जिन पर इस अंतरिम बजट के दौरान नजर डाली जा सकती है। लोकसभा चुनाव हो जाने के बाद जो भी सरकार नियुक्त होकर आएगी वह पूर्ण बजट लाएगी।
डिफेंस सेक्टर में भारत का एक्सपोर्ट लगातार बढ़ता जा रहा है। जमीन पर ही नहीं हवा में मार करने वाले डिफेंस एक्सपोर्ट सिस्टम को भी भारत अब दूसरे देशों को बेच रहा है। रक्षा सचिव ने बताया है कि नेवी में देश डिफेंस सेक्टर में काफी आत्मनिर्भर हो गया है। अब भारत खुद अपनी वारशिप बना रहा है, जिसमें आपको डिस्ट्रॉयर, सबमरीन और सभी लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से लैस सिस्टम मिलेंगे।
आपको बताते चले कि मेक इन इंडिया के तहत भारत में डिफेंस सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। दिसंबर 2021 के बाद से डिफेंस एक्सपोर्ट पर बैन लगाया गया था। उसके बाद से भारत ऐसे ही सिस्टम खरीदता है जिसकी उपलब्धता देश में नहीं है। किसी कंपनी के पास टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं है तो वह भारत में जॉइंट वेंचर द्वारा या फिर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिए डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कर सकते हैं। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी साथी रोजगार के कई नए अवसर भी तैयार हो जाएंगे।
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