National Pension Scheme: 60 साल के बाद इनकम को जारी रखने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम(NPS) काफी जरूरी होता है। इसमें निवेश करके आप केवल पेंशन का लाभ ही नहीं बल्कि टैक्स बेनिफिट जैसे फायदे भी पा सकते हैं। 23 जुलाई को बजट पेश होने वाला है। केंद्र सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के लिए 50 प्रतिशत पेंशन गारंटी पर कोई अहम फैसला ले सकती है।
NPS पेंशन पर 50 फीसदी गारंटी का ऐलान हो सकता है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश में बनी गठबंधन की सरकार के लिए पहली बार बजट पेश करेंगी और इस बजट में रोजगार से लेकर ग्रामीण विकास तक पर फोकस रहने की उम्मीद है। इसके अलावा सरकार से केंद्रीय कर्मचारियों के लिए NPS पेंशन पर 50 फीसदी गारंटी की घोषणा करने की भी संभावना है।
केंद्र सरकार कर्मचारियों की चिंताओं को दूर करना चाहती है, ऐसे में वह NPS पर केंद्रीय कर्मचारियों को पेंशन के रूप में अंतिम वेतन पर 50 प्रतिशत की पेंशन गारंटी दे सकती है।
पिछले साल बनाई गई थी कमेटी
साल 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के बाद वित्त सचिव टीवी सोमनाथन के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया था जिसका उद्देश्य नॉन कंट्रीब्यूटरी ओल्ड पेंशन स्कीम(ओपीएस) पर वापस लौटे बिना नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत पेंशन लाभों में सुधार के तरीकों का पता लगाना था। हालांकि केंद्र सरकार ने वापस पुरानी पेंशन योजना पर लौटने से इनकार कर दिया था।
कौन कर सकता है एनपीएस में निवेश?
कंपनियां अपनी इच्छा से अपने एंप्लॉयीज को एनपीएस की सुविधा दे सकती हैं। एनपीएस का वॉलेंटरी मॉडल सभी लोगों के लिए उपलब्ध है। विदेश में रहने वाले भारतीय भी इसमें कंट्रिब्यूट कर सकते हैं। इसके लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 70 साल है। एनपीएस में निवेश करने के कई फायदे हैं।
ओपीएस और एनपीएस के बीच की तुलना
ओपीएस कर्मचारी के अंतिम मूल वेतन और सर्विस के सालों के आधार पर एक निश्चित पेंशन राशि की गारंटी देता है, जबकि एनपीएस पेंशन खाते में जमा धन पर निर्भर करता है। ओपीएस मूल्य वृद्धि के लिए पेंशन और उम्र के आधार पर अतिरिक्त मूल पेंशन भी प्रदान करता है, जबकि एनपीएस में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
सरकार के तहत फिलहाल 1 जनवरी 2004 या उसके बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए ओपीएस को बहाल करने पर पुनर्विचार करने की उसकी कोई योजना नहीं है। सरकार का उद्देश्य पेंशन का लाभ प्रदान करने और राजकोषीय जिम्मेदारी बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना है।
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