Budget 2023 : आगामी बजट, 2024 के लोकसभा चुनावों के पहले का यह आखिरी पूर्ण बजट हो सकता है। भारत के आर्थिक इतिहास में यह एक बेहद ही अहम मोड़ भी होगा। बड़ी इकोनॉमीज में भारत का ग्रोथ रेट काफी अधिक है। दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत ही है। जबकि, भारत पर्चेंजिंग पावर पैरिटी में यह तीसरे पायदान पर है। कॉविड के असर के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने काफी तेजी से रिकवरी की है। नॉमिनल जीडीपी वित्तीय वर्ष 2022-23 में 273 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वहीं, रियल टर्म में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ वित्तीय वर्ष 2022-23 में 6 प्रतिशत से 7 प्रतिशत रह सकती है यानी जीडीपी में लगभग 32 लाख करोड़ रूपये की वृद्धि होगी। जो एक काफी बड़ी राशि है।

Advertisement

आसान बनाया जाएं इनकम टैक्स रीजीम को

टैक्सेशन से जुड़े हुए पुराने मसले है। इसको हल करने के लिए सरकार को अगामी बजट 2023 के मौके का उपयोग करना चाहिए। अधिक समय से महंगाई का हाई पर बने रहने के बाद भी पर्सनल इनकम टैक्स के रट्स है। इसमें बदलाव नहीं किया गया है। जो मिडिल क्लास लोग है। इनको टैक्स स्लैब के विस्तार की संभावना है। अभी के समय में 25 साल से 55 साल की आयु का जो व्यक्ति घर खरीद रहा है और अपने भविष्य के लिए बचत कर रहा है। जैसे इंटरेस्ट, हाउसिंग, सेविंग्स आदि पर बहुत प्रकार का एग्जेम्प्शंस और डिडक्शंस उपलब्ध हैं। जो लोग 55 वर्ष से अधिक आयु वाले है। इस स्ट्रक्चर का अधिक फायदा नहीं है। सरकार की तरफ से दो साल पहले भी टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने का प्रयास किया गया था। उसने बिना एग्जेम्प्शंस वाली नई रीजीम शुरू की थी। लेकिन कुछ ही टैक्सपेयर्स हैं। जिसने इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई। अब उम्मीद है। कि टैक्स स्लैब्स में सरकार बदलाव करेगी।

Advertisement
जल्द समाधान करना होगा टैक्स विवादों का

टैक्स विवाद का सेटलमेंट वर्ष वित्तीय वर्ष 2022-23 हो सकता है। इस कारण से टैक्स से जुड़े हुए विवादों की संख्या बढ़ी है। टैक्स से जुड़े मामलों की सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो बेंच बनाई है। इसका फायदा आयकर विभाग को उठाना चाहिए। जिससे आने वाले वर्षों में टैक्स विवाद की संख्या में कमी लानी होगी।

Budget 2023-24: फटाफट निपटा लो ये काम, नहीं तो कट जाएगी सैलरी| Income Tax| Save Taxes| GoodReturns
12 लाख करोड़ रूपये के टैक्स विवाद मामले है

दूसरा जो मसला है। यह टैक्स आधिकारिक के ट्रेंड से जुड़ा है। पहले अधिक टैक्स एसेसमेंट किया जाता है, जिसे बाद में ट्राइब्यनल्स या कोर्ट में घटा दिया जाता है। हालांकि, टैक्स टेररिज्म में कमी आई हैं, लेकिन अब यह एक मसला है। अधिक टैक्स एसेसमेंट है। इसके लिए अधिकारियों की पहचान की जानी चाहिए। उनको जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। जो बजट के दस्तावेज है। इससे पता चलता है कि 12 लाख करोड़ रूपये के टैक्स विवाद मामले है। जो लंबित है। वहीं, वर्ष 2004 में यह 4.5 लाख करोड़ रूपये था। इस मामलों का निपटारा किया जाना चाहिए और इसके लिए गंभीर कोशिश की जानी चाहिए।