नई द‍िल्‍ली: वित्त वर्ष 2021-22 का बजट 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का तीसरा बजट होगा। बता दें कि साल 2017 से पहले रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया जाता था। लेकिन अब आम बजट के साथ ही रेल बजट पेश किया जाता है। इस बार रेल यात्रियों को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खासी उम्मीदें हैं। वित्त मंत्री ने खुद कहा है कि इस बार का बजट पिछले 100 साल की तुलना में अलग होगा।

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दरअसल, महामारी संकट की वजह से रेलवे की भी रफ्तार थम गई थी। इस बजट में रेलवे से जुड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर हो सकता है। यात्री सुविधाओं पर भी सरकार का फोकस हो सकता है। यात्री तो किराये में भी कटौती की आस लगाए बैठे हैं। वैसे महामारी संकट के बीच भारतीय रेलवे ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने का काम किया है। इसके अलावा बुलेट ट्रेन मोदी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। जानकारी दें कि महामारी की वजह से इस योजना की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। वहीं उम्मीद की जा रही है कि बजट में सरकार बुलेट ट्रेन को लेकर आगे की तस्वीर पेश कर सकती है। बुलेट ट्रेन नेटवर्क को लेकर सरकार अपनी योजना बता सकती है।

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गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 को पेश करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना पर तेजी से काम कर रही है। जबकि पिछले साल ही दिसंबर में रेल मंत्रालय ने लंबी अवधि में अपनी रणनीति के लिए 'नेशनल रेल प्लान 2024' जारी किया था। इसमें रेलवे के इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षमता और मॉडल शेयर को बढ़ाने के बारे में जानकारी थी। इसमें हाई-स्पीड रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर को तैयार करने का भी जिक्र था। मंत्रालय ने यह भी कहा था कि जनवरी 2021 तक इस प्लान को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

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वहीं प्रस्तावित ड्राफ्ट प्लान के मुताबिक साल 2051 तक देशभर में 8,000 किलोमीटर के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क तैयार किए जाएंगे। इसमें नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर्स भी शामिल हैं। वाराणसी-पटना, अमृतसर-जम्मू और पटना-गुवाहाटी रूट के लिए भी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर प्रस्तावित है। फिलहाल भारत में केवल एक ही बुलेट ट्रेन कॉरिडोर है। यह मुंबई और अहमदाबाद के बीच में है और इसपर अभी काम चल रहा है। बुलेट ट्रेन के अन्य कॉरिडोर में ​आयोध्या के जरिए दिल्ली-वाराणसी, हैदराबाद-बेंगलुरु और मुंबई-नागपुर के बीच भी प्रस्तावित है।

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सुरक्षा को लेकर हो सकती है अहम घोषणाएं
इसके अलावा रेल बजट में सुरक्षा के मद्देनजर भी कई अहम घोषणाएं की जा सकती हैं। राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष केलिए आवंटन में 50 फीसदी वृद्धि की मांग की गई है। मौजूदा समय में 20,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर हर पांच साल पर 30 हजार करोड़ रुपए किए जाने की मांग की जा रही है। इससे सुरक्षा के बुनियादी ढांचों में लेटेस्ट टेक्नॉलोजी को लाने में मदद मिलेगी।

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